श्रीमुण्डमालातंत्रे महाविद्यास्तोत्रं

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|| महाविद्यास्तोत्रम् ||
ॐ नमस्ते चण्डिके चण्डि चण्डमुण्डविनाशिनि ।
नमस्ते कालिके कालमहाभयविनाशिनि ॥
शिवे रक्ष जगद्घात्रि प्रसीद हरवल्लभे ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं जगत्पालनकारिणीम् ॥
जगत् क्षोभकरीं विद्यां जगत्सृष्टिविधायिनीम् ।
करालां विकटां घोरां मुण्डमालाविभूषिताम् ॥
हरार्चितां हराराध्यां नमामि हरवल्लभाम् ।
गौरीं गुरुप्रियां गौरवर्णालङ्कारभूषिताम् ॥
हरिप्रियां महामायां नमामि ब्रह्मपूजिताम् ।
सिद्धां सिद्धेश्वरीं सिद्धविद्याधरगणैर्युताम् ॥
मन्त्रसिद्धिप्रदां योनिसिद्धिदां लिङ्गशोभिताम् ।
प्रणमामि महामायां दुर्गां दुर्गतिनाशिनीम् ॥
उग्रामुग्रमयीमुग्रतारामुग्रगणैर्युताम् ।
नीलां नीलघनश्यामां नमामि नीलसुन्दरीम् ॥
श्यामाङ्गीं श्यामघटितां श्यामवर्णविभूषिताम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं गौरीं सर्वार्थसाधिनीम् ॥
विश्वेश्वरीं महाघोरां विकटां घोरनादिनीम् ।
आद्यामाद्यगुरोराद्यामाद्यनाथप्रपूजिताम् ॥
श्री दुर्गा धनदामन्नपूर्णां पद्मां सुरेश्वरीम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं चन्द्रशेखरवल्लभाम् ॥
त्रिपुरां सुन्दरीं बालामबलागणभूषिताम् ।
शिवदूतीं शिवाराध्यां शिवध्येयां सनातनीम् ॥
सुन्दरीं तारिणीं सर्वशिवागणविभूषिताम् ।
नारायणीं विष्णुपूज्यां ब्रह्मविष्णुहरप्रियाम् ॥
सर्वसिद्धिप्रदां नित्यामनित्यां गुणवर्जिताम् ।
सगुणां निर्गुणां ध्येयामर्चितां सर्वसिद्धिदाम् ॥
विद्यां सिद्धिप्रदां विद्यां महाविद्यां महेश्वरीम् ।
महेशभक्तां माहेशीं महाकालप्रपूजिताम् ॥
प्रणमामि जगद्धात्रीं शुम्भासुरविमर्दिनीम् ।
रक्तप्रियां रक्तवर्णां रक्तबीजविमर्दिनीम् ॥
भैरवीं भुवनां देवीं लोलजिह्वां सुरेश्वरीम् ।
चतुर्भुजां दशभुजामष्टादशभुजां शुभाम् ॥
त्रिपुरेशीं विश्वनाथप्रियां विश्वेश्वरीं शिवाम् ।
अट्टहासामट्टहासप्रियां धूम्रविनाशिनीम् ॥
कमलां छिन्नभालाञ्च मातंगीं सुरसुन्दरीम् ।
षोडशीं विजयां भीमां धूमाञ्च वगलामुखीम् ॥
सर्वसिद्धिप्रदां सर्वविद्यामन्त्रविशोधिनीम् ।
प्रणमामि जगत्तारां साराञ्च मन्त्रसिद्धये ॥
इत्येवञ्च वरारोहे, स्तोत्रं सिद्धिकरं परम् ।
पठित्वा मोक्षमाप्नोति सत्यं वै गिरिनन्दिनि ॥

इति श्रीमुण्डमालातंत्रे महाविद्यास्तोत्रं संपूर्णम् ।।

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🟨🔱🔴 महाविद्यास्तोत्रम् – हिन्दी अर्थ सहित 🔴🔱🟨

ॐ नमस्ते चण्डिके चण्डि चण्डमुण्डविनाशिनि ।
नमस्ते कालिके कालमहाभयविनाशिनि ॥

अर्थ:
हे चण्डिका देवी! चण्ड और मुण्ड नामक दानवों का संहार करनेवाली, आपको नमस्कार है।
हे कालिका! कालरूपी महाभय को नष्ट करनेवाली, आपको बार-बार प्रणाम है।

शिवे रक्ष जगद्घात्रि प्रसीद हरवल्लभे ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं जगत्पालनकारिणीम् ॥

अर्थ:
हे शिवे! जगत की धात्री (धारण करनेवाली), रक्षण करनेवाली, हे हरवल्लभे! प्रसन्न होइए।
हे जगद्धात्री! आपको प्रणाम है, आप ही जगत की पालनकर्त्री हैं।

जगत् क्षोभकरीं विद्यां जगत्सृष्टिविधायिनीम् ।
करालां विकटां घोरां मुण्डमालाविभूषिताम् ॥

अर्थ:
आप वह विद्याशक्ति हैं जो सम्पूर्ण जगत को हिला देने वाली है। आप ही जगत की सृष्टि की विधायिनी हैं।
आप कराल (भयावनी), विकट और अत्यन्त घोर रूप वाली हैं, मुण्डमाला से विभूषित हैं।

हरार्चितां हराराध्यां नमामि हरवल्लभाम्
गौरीं गुरुप्रियां गौरवर्णालङ्कारभूषिताम् ॥

अर्थ:
हे हर द्वारा पूजित और हर को आराध्य रूप में भानेवाली हरवल्लभे! आपको प्रणाम।
आप गौरी हैं, गुरुजनों को प्रिय, गौर वर्ण (स्वर्ण या चाँदनी समान उज्ज्वल) से सुशोभिता।

हरिप्रियां महामायां नमामि ब्रह्मपूजिताम् ।
सिद्धां सिद्धेश्वरीं सिद्धविद्याधरगणैर्युताम् ॥

अर्थ:
हे हरिप्रिया महामाया! ब्रह्मा द्वारा पूजित, आपको प्रणाम।
आप सिद्धा हैं, सिद्धेश्वरी हैं, और सिद्ध, विद्याधर तथा दिव्यगणों से युक्त हैं।

मन्त्रसिद्धिप्रदां योनिसिद्धिदां लिङ्गशोभिताम् ।
प्रणमामि महामायां दुर्गां दुर्गतिनाशिनीम् ॥

अर्थ:
आप मन्त्रसिद्धि प्रदान करनेवाली हैं, योगिनी व सिद्धियों की दात्री हैं।
हे महामाया दुर्गा! जो समस्त दुर्गतियों का नाश करती हैं, आपको प्रणाम।

उग्रामुग्रमयीमुग्रतारामुग्रगणैर्युताम् ।
नीलां नीलघनश्यामां नमामि नीलसुन्दरीम् ॥

अर्थ:
आप उग्र स्वरूप वाली हैं, उग्रगणों से युक्त हैं, उग्रतारा स्वरूप हैं।
आप नीलवर्ण, घनश्याम समान रूपवाली नीलसुन्दरी हैं, आपको नमस्कार।

श्यामाङ्गीं श्यामघटितां श्यामवर्णविभूषिताम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं गौरीं सर्वार्थसाधिनीम् ॥

अर्थ:
आप श्यामवर्ण अंगों वाली हैं, श्याम घटित रूप में प्रकाशित हैं।
हे गौरी! जो जगत की धात्री हैं और सभी अर्थों की साधिनी हैं, आपको प्रणाम।

विश्वेश्वरीं महाघोरां विकटां घोरनादिनीम् ।
आद्यामाद्यगुरोराद्यामाद्यनाथप्रपूजिताम् ॥

अर्थ:
आप विश्वेश्वरी हैं, महाघोर विकट रूपवाली और घोरनाद करनेवाली हैं।
आप आदि शक्ति हैं, आदि गुरु हैं, और आदि नाथ (शिव) द्वारा पूजित हैं।


श्री दुर्गा धनदामन्नपूर्णां पद्मां सुरेश्वरीम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं चन्द्रशेखरवल्लभाम् ॥

अर्थ:
आप दुर्गा हैं, धन देनेवाली, अन्नपूर्णा, पद्मा (लक्ष्मी) और सुरेश्वरी हैं।
हे चन्द्रशेखर की प्रिया, जगद्धात्री! आपको प्रणाम।

त्रिपुरां सुन्दरीं बालामबलागणभूषिताम् ।
शिवदूतीं शिवाराध्यां शिवध्येयां सनातनीम् ॥

अर्थ:
आप त्रिपुरा सुन्दरी हैं, बालिका रूप में बालगणों से भूषिता।
आप शिवदूती हैं, शिवाराध्या हैं, सनातनी हैं, और शिवध्यान की अधिष्ठात्री हैं।

सुन्दरीं तारिणीं सर्वशिवागणविभूषिताम् ।
नारायणीं विष्णुपूज्यां ब्रह्मविष्णुहरप्रियाम् ॥

अर्थ:
आप सुन्दरी हैं, तारिणी हैं, शिवगणों से विभूषिता हैं।
आप नारायणी हैं, विष्णु द्वारा पूजित, और ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों की प्रिय हैं।

सर्वसिद्धिप्रदां नित्यामनित्यां गुणवर्जिताम् ।
सगुणां निर्गुणां ध्येयामर्चितां सर्वसिद्धिदाम् ॥

अर्थ:
आप सर्वसिद्धि प्रदान करनेवाली, नित्य व अनित्य दोनों स्वरूपों से युक्त हैं।
आप सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में ध्येय व पूज्य हैं और सर्व सिद्धियों की दात्री हैं।

विद्यां सिद्धिप्रदां विद्यां महाविद्यां महेश्वरीम् ।
महेशभक्तां माहेशीं महाकालप्रपूजिताम् ॥

अर्थ:
आप ही विद्याशक्ति हैं, सिद्धि प्रदान करनेवाली, महाविद्या और महेश्वरी हैं।
आप महेश की भक्त, माहेश्वरी और महाकाल द्वारा पूजित हैं।

प्रणमामि जगद्धात्रीं शुम्भासुरविमर्दिनीम् ।
रक्तप्रियां रक्तवर्णां रक्तबीजविमर्दिनीम् ॥

अर्थ:
हे जगद्धात्री! शुम्भासुर का संहार करनेवाली, आपको प्रणाम।
आप रक्तप्रिय हैं, रक्तवर्णिनी हैं और रक्तबीज का वध करनेवाली हैं।

भैरवीं भुवनां देवीं लोलजिह्वां सुरेश्वरीम् ।
चतुर्भुजां दशभुजामष्टादशभुजां शुभाम् ॥

अर्थ:
आप भैरवी हैं, तीनों लोकों की देवी हैं, लोलजिह्वा और सुरेश्वरी हैं।
आप चतुर्भुजा, दशभुजा और अष्टादशभुजा स्वरूपिणी हैं।

त्रिपुरेशीं विश्वनाथप्रियां विश्वेश्वरीं शिवाम् ।
अट्टहासामट्टहासप्रियां धूम्रविनाशिनीम् ॥

अर्थ:
आप त्रिपुरेश्वरी हैं, विश्वनाथ की प्रिया, विश्वेश्वरी और शिवा हैं।
आप अट्टहासिनी हैं, अट्टहास में प्रसन्न होनेवाली और धूम्र संहारिणी हैं।

कमलां छिन्नभालाञ्च मातंगीं सुरसुन्दरीम् ।
षोडशीं विजयां भीमां धूमाञ्च वगलामुखीम् ॥

अर्थ:
आप कमला हैं, छिन्नमस्ता हैं, मातंगी हैं और सुरसुन्दरी हैं।
आप षोडशी हैं, विजयशक्ति हैं, भीमा हैं, धूमावती और बगलामुखी हैं।

सर्वसिद्धिप्रदां सर्वविद्यामन्त्रविशोधिनीम् ।
प्रणमामि जगत्तारां साराञ्च मन्त्रसिद्धये ॥

अर्थ:
आप सर्व सिद्धियों की दात्री हैं, सभी विद्याओं और मन्त्रों को शुद्ध करनेवाली हैं।
हे जगत्तारा! मन्त्रसिद्धि के लिए मैं आपको प्रणाम करता हूँ।

इत्येवञ्च वरारोहे, स्तोत्रं सिद्धिकरं परम् ।
पठित्वा मोक्षमाप्नोति सत्यं वै गिरिनन्दिनि ॥

अर्थ:
हे वरारोहे! यह स्तोत्र परम सिद्धिदायक है।
इसे पढ़कर साधक मोक्ष प्राप्त करता है।
हे गिरिनन्दिनि! यह सत्य है।


॥ इति श्रीमुण्डमालातंत्रे महाविद्यास्तोत्रं संपूर्णम् ॥

—( यह स्तोत्र महाविद्याओं के सभी स्वरूपों की आराधना और उनकी महिमा का संक्षिप्त ग्रंथ है। इसके जप, पाठ या ध्यान से साधक को सिद्धि, समृद्धि, संरक्षण और अन्ततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।)

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