छठ पूजन की तैयारियों में जुटी महिलाओं का फूटा गुस्सा, कहा जिम्मेदार कौन

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र नगवां ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत दूबेपुर में आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारी चल रही है, लेकिन नगवां ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत दूबेपुर में स्वच्छता व्यवस्था की पोल खुल गई है। जहां एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर प्रतिवर्ष अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर दूबेपुर गांव के छठ घाटों की बदहाली और गंदगी सरकारी दावों की सच्चाई उजागर कर रही है।छठ पूजा की तैयारियों में जुटी महिलाओं और ग्रामीणों ने बताया कि गांव के तालाबों और घाटों पर कूड़े-कचरे, घास-फूस और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। छठ पूजा के पहले भी किसी प्रकार की सफाई नहीं कराई गई है, जिससे श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अधिकारी और सफाई कर्मी अपनी ड्यूटी के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं हैं।स्थानीय निवासी रीना देवी ने बताया कि “ग्राम पंचायत दूबेपुर में लगभग 200 महिलाएं छठ व्रत करती हैं, लेकिन घाट की ऐसी स्थिति देखकर मन आहत होता है।” कई महिलाओं ने स्वयं झाड़ू और फावड़ा लेकर सफाई शुरू कर दी है ताकि धार्मिक आयोजन में कोई बाधा न आए। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार सफाई नहीं करा रहे तो उन्हें स्वयं अपने हाथों में झाड़ू उठानी पड़ रही है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में सफाई कर्मियों की नियुक्ति ही नहीं की गई है। शिकायत ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि अगर छठ से पहले तालाब और घाट की सफाई नहीं कराई गई, तो वे जिलाधिकारी सोनभद्र का घेराव करेंगे।सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गांवों में स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों पर चल रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया स्वच्छता अभियान ग्रामीण स्तर पर लापरवाही की भेंट चढ़ गया है, जबकि सरकार हर वर्ष इस अभियान के लिए भारी बजट जारी करती है।
इधर छठ पर्व को लेकर महिलाएं दिन-रात तैयारियों में जुटी हैं और अपने स्तर पर घाटों को साफ कर पूजा स्थल तैयार करने में लगी हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि ग्रामीण अपनी आस्था से समझौता नहीं करना चाहते।ग्रामीणों ने एकजुट होकर चेतावनी दी अगर छठ से पूर्व घाट की सफाई नहीं हुई तो हम शांत नहीं बैठेंगे, मजबूर होकर आंदोलन करेंगे।”
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब हरकत में आता है और आस्था के इस महापर्व पर श्रद्धालुओं को स्वच्छता का उपहार मिल पाता है या नहीं।

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