हाइड्रिल मैदान में प्रशासन की सख्ती,प्रदर्शनी स्थल पर बुलडोजर की प्रतीकात्मक कार्रवाई जल्द खाली कराने के निर्देश

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –किरण साहनी

सोनभद्र रॉबर्ट्सगंज स्थित हाइड्रिल मैदान में शनिवार को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में मेला प्रदर्शनी स्थल पर प्रतीकात्मक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। करीब दोपहर बाद शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान बुलडोजर की मदद से मैदान के बाहर लगी बांस-बल्लियां, लकड़ी के खंभे और अस्थायी बिजली के कनेक्शन हटाए गए। कुछ देर बाद कार्रवाई को रोक दिया गया, पर अधिकारियों ने आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मैदान को बिना देरी के खाली किया जाए।जानकारी के अनुसार, हाइड्रिल मैदान में बीते दो माह से मेला प्रदर्शनी का आयोजन चल रहा था। शुरू में यह प्रदर्शनी स्थानीय व्यापारिक संघों और बाहरी कंपनियों के सहयोग से लगाई गई थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को मनोरंजन और खरीदारी की सुविधा प्रदान करना बताया गया था। प्रारंभिक अवधि पूरी होने के बाद आयोजकों ने इसकी अवधि 26 अक्टूबर तक बढ़ाई थी, लेकिन निर्धारित तिथि बीतने के बाद भी मैदान खाली नहीं किया गया।इस देरी से सदर विधायक भूपेश चौबे नाराज बताए जा रहे हैं। विधायक ने इसे लेकर कई बार नाराजगी जताई और अधिकारियों से मैदान जल्द खाली कराने की मांग की थी। मैदान उपलब्ध न होने की वजह से ‘विधायक खेल महाकुंभ’ का आयोजन प्रभावित होता दिख रहा था। हालात ऐसे बने कि विधायक ने अपने समर्थकों के साथ सड़क पर ही खिलाड़ियों के नामांकन फॉर्म भरने शुरू कर दिए, जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया।बताया जा रहा है कि विधायक खेल महाकुंभ क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ा मंच है, जिसमें प्रतिभागी विभिन्न खेलों में अपनी क्षमता दिखाते हैं। यह आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी हाइड्रिल मैदान में प्रस्तावित है। ऐसे में समय पर मैदान खाली न होने की स्थिति में पूरा आयोजन संकट में पड़ सकता था।शनिवार को जब प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची तो प्रदर्शनी आयोजकों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ कारोबारियों ने प्रशासन से कुछ समय और मांगा, लेकिन अधिकारियों ने साफ निर्देश दिया कि मैदान अब केवल खेल आयोजन के लिए ही उपलब्ध रहेगा। एसडीएम, नगर हेतु पुलिस अधिकारी और विद्युत विभाग के कर्मचारी कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे।सदर विधायक भूपेश चौबे ने मौके पर कहा कि यह कार्रवाई सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर सांकेतिक रूप से की गई है, जिससे यह संदेश जाए कि नियम और समयसीमा सभी के लिए समान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है और खिलाड़ियों के हित में प्रशासन को मैदान खाली करना ही पड़ा।बुलडोजर की प्रतीकात्मक कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आयोजक अब शेष सामान समेटकर जल्द मैदान को पूरी तरह खाली कर देंगे, जिससे खेल महाकुंभ की तैयारियां समय पर शुरू की जा सकें। स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि प्रशासन का यह निर्णय सही समय पर लिया गया है, क्योंकि मैदान सार्वजनिक उपयोग के लिए है और निजी आयोजन लंबे समय तक चलने से सरकारी तैयारियां प्रभावित होती हैं।

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