तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट एआईपीएफ की जिला कमेटी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए घटना की जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग से कराए जाने की मांग की है।एआई पीएफ के जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका ने बताया कि संगठन की जिला कमेटी की बैठक में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि वर्ष 2000 से भाजपा शासनकाल में शुरू हुआ अवैध खनन का कारोबार आज संगठित सिंडिकेट के रूप में परिवर्तित हो गया है। जिले में हो रहे इस खनन कारोबार के तार पिछली और वर्तमान सभी सरकारों से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक जुड़े रहे हैं।पनिका ने बताया कि खनन कार्यों में माइंस सेफ्टी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। मानक से कहीं अधिक गहराई तक खनन किए जाने से गहरी खाइयां बन गई हैं, जिससे हादसों की आशंका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि न तो एनजीटी के आदेशों का पालन किया जा रहा है, न ही पर्यावरणीय नियमों का सम्मान। बार-बार जिला प्रशासन और श्रम विभाग से आग्रह के बावजूद खनन में कार्यरत मजदूरों का भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया गया है। नतीजतन मजदूर सामाजिक और जीवन सुरक्षा से वंचित हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि खनन कार्यों में ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर अकुशल श्रमिकों को लगाया जाता है। जिले की नदियां, पहाड़ और जंगल लगातार गुजरात से आए सिंडिकेट द्वारा लूटे जा रहे हैं। प्राकृतिक संपदा का बेशर्म दोहन जारी है। पनिका ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर इतना बड़ा हादसा होता है और दो दिन बीत जाने के बाद भी सभी मजदूरों को मलबे से बाहर नहीं निकाला जा सका, न ही मुआवजे की घोषणा हुई है।संगठन ने कहा कि यदि भाजपा शासन और उसके नेताओं की बयानबाजी में सच्चाई है, तो उन्हें सोनभद्र में चल रहे इस खनन सिंडिकेट पर श्वेतपत्र जारी करना चाहिए। एआईपीएफ ने मांग की है कि हादसे में मारे गए मजदूरों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, खनन कार्यों को सरकारी नियंत्रण में लाया जाए, तथा एनजीटी और माइंस सेफ्टी एक्ट का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, इस हादसे के दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।






