तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। बिल्ली मारकुण्डी क्षेत्र स्थित कृष्णा माइंस वर्क्स में शनिवार देर शाम हुए खनन हादसे के बाद तीसरे दिन तक राहत एवं बचाव कार्य जारी है। अब तक पांच मजदूरों के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। घटना के बाद से राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें लगातार 48 घंटे से अधिक समय से घटनास्थल पर बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष योगेंद्र डिमरी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बताया कि अभियान बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि मलबे के नीचे और भी अवशेष या दरारें हैं जो किसी भी समय धंसक सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पूरी पुष्टि नहीं हो जाती कि कोई व्यक्ति मलबे के नीचे नहीं बचा है, तब तक अभियान जारी रहेगा। डिमरी ने टीमों के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी बचावकर्मी लगातार मेहनत कर रहे हैं।रविवार को प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने भी मौके का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस हादसे को अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही वे स्वयं मौके पर पहुंचे और राहत उपायों की समीक्षा की।मंत्री जायसवाल ने घोषणा की कि हादसे में मारे गए सभी मजदूरों के परिजनों को राज्य सरकार, श्रम विभाग, खनन विभाग और अन्य संबद्ध विभागों की ओर से लगभग 20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। बरामद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उन्हें संबंधित परिजनों को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद की जाएगी।अवैध खनन के संबंध में पूछे गए सवाल पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक रूप से तीन पहलुओं पर जांच का दायरा तय किया गया है – खनन की प्रकृति एवं वैधता, पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर, और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद या प्रभावशाली स्थिति में क्यों न हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।उधर, जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा कारणों से घेराबंदी कर दिया है और खनन स्थल पर मीडिया व आम जन की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई गई है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय कई मजदूर गहराई में पत्थर तोड़ने का काम कर रहे थे, तभी अचानक मिट्टी और चट्टान धंसने से वे मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों और मजदूरों ने प्राथमिक बचाव का प्रयास किया, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई।यह हादसा न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देता है, बल्कि क्षेत्र में चल रहे खनन कार्यों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।






