तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। करीब साढ़े सात वर्ष पूर्व पन्नूगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म एवं आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चले मुकदमे में आरोपी नीरज गिरी को अदालत ने दोषमुक्त करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है।मामला वर्ष 2018 का है। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 28 जून 2018 को पन्नूगंज थाने में तहरीर देकर बताया था कि 24 जून को वे अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रिश्तेदारी में शादी समारोह में गए थे। घर पर उनकी दो नाबालिग बेटियां, जिनकी उम्र क्रमशः 16 और 13 वर्ष थी, अकेली थीं। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि उसी दिन गांव के ही निवासी नीरज गिरी पुत्र संतधारी गिरी ने घर में घुसकर 16 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ की थी।शिकायत के मुताबिक, 26 जून को जब परिवार वापस लौटा तो घर से नीरज गिरी को बाहर निकलकर भागते देखा गया। घर आने पर बड़ी बेटी ने बताया कि आरोपी उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास कर रहा था और मुंह दबाकर डराया-धमकाया था। उसने यह भी बताया कि 24 जून को भी आरोपी ने उससे जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। इस घटना से आहत होकर 27 जून को लड़की ने घर में रखी कीटनाशक दवा खा ली, जिससे उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। परिवार द्वारा 28 जून को थाने में तहरीर दी गई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, घर में घुसपैठ, आत्महत्या के लिए उकसाने तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की थी।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए। हालांकि, न्यायालय ने सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि घटनाक्रम की पुष्टि के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी नीरज गिरी (30) वर्ष निवासी परसिया, थाना पन्नूगंज जिला सोनभद्र को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।फैसले के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र दुबे ने तर्क रखते हुए कहा कि पूरा मामला संदेहास्पद परिस्थितियों पर आधारित था और अभियोजन कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने इसी आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।






