तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। सात वर्ष पूर्व नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। न्यायालय ने दोषी पाए गए विशाल सोनकर निवासी पुसौली, थाना रॉबर्ट्सगंज को तीन वर्ष का साधारण कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने की स्थिति में दोषी को दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।मामला सात वर्ष पुराना मामले के अनुसार, रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां ने 24 सितंबर 2018 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि 11 सितंबर 2018 को शाम लगभग साढ़े चार बजे आरोपी विशाल सोनकर अपने तीन-चार साथियों के साथ आया और उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी का जबरन अपहरण कर ले गया। परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। अगले दिन शाम साढ़े सात बजे आरोपी युवती को चौकी के पास छोड़कर फरार हो गए।धमकी और दोबारा लापता होने की घटनापीड़िता को घर लाने के बाद उसने बताया कि आरोपी ने उसका वीडियो क्लिप बना लिया और धमकी दी कि यदि उसने शोर मचाया या शिकायत की तो वीडियो वायरल कर देंगे। लेकिन 20 सितंबर की शाम पीड़िता फिर से गायब हो गई। परिवार ने दोबारा रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में सूचना दी, लेकिन पुलिस ने खोजबीन की जिम्मेदारी परिजनों पर छोड़ दी। लगातार तलाश के बावजूद लड़की का कोई सुराग नहीं मिला। जब परिजन आरोपी विशाल के घर पहुंचे तो उसके भाई ने कहा कि ‘वह लड़की को भगा ले गया है’ और धमकी दी कि शिकायत करने पर हरिजन एक्ट में फंसा देंगे।विवेचना और अदालत का निर्णयपरिवार की शिकायत पर आखिरकार रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने 27 सितंबर 2018 को एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विवेचक ने आरोपी विशाल सोनकर के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें, सात गवाहों के बयान और समस्त पत्रावली का अध्ययन करने के बाद अदालत ने आरोपी को अपहरण का दोषी ठहराकर सजा सुनाई।अभियोजन पक्ष की सक्रिय भूमिकाअभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी तरीके से पक्ष रखा। अदालत ने माना कि अभियोजन के साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।अदालत के इस फैसले के साथ ही यह मामला सात वर्ष बाद अपने निष्कर्ष पर पहुंचा, जिससे पीड़िता व उसके परिवार को न्याय मिला है।






