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वाराणसी। जिला एवं सत्र न्यायालय की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बच्चा चोरी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग में शामिल गिरोह के सात सदस्यों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर आए इस फैसले में प्रत्येक दोषी पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इसी मामले में आठ आरोपियों को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ मिला और उन्हें किसी भी आरोप में दोषी नहीं पाया गया। कुल 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
कौन-कौन दोषी घोषित हुए?
एफटीसी के जज कुलदीप सिंह ने संतोष गुप्ता, मनीष जैन, महेश राणा, मुकेश पंडित, महेश राणा (पुत्र रामलाल), सीखा और सुनीता देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसला सुनते ही सभी दोषी अदालत में भावुक दिखाई दिए।
अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज गुप्ता ने जिरह कर आरोप साबित किए।
कैसे हुआ था बच्चा किडनैप?
14 मई की रात भेलूपुर के रवींद्रपुरी स्थित रामचंद्र शुक्ल चौराहे पर चार वर्षीय बच्चा अपने माता-पिता के साथ सो रहा था। तभी कार सवार तस्करों ने उसे उठा लिया।
दो दिन तक माता-पिता बच्चे की तलाश में भटके। इसी दौरान दरोगा शिवम श्रीवास्तव को सूचना मिली और उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पूरी साजिश का खुलासा किया।
फुटेज से पता चला कि कार को किराए पर लिया गया था। जांच में मंडुआडीह निवासी ड्राइवर संतोष गुप्ता और उसका साथी विनय मिश्रा पकड़े गए। विनय ने बच्चे को माता-पिता के बीच से उठाया था। पुलिस ने उस कार को भी सीज कर दिया, जिसका उपयोग बच्चे के अपहरण में किया गया था।
झारखंड–राजस्थान मॉड्यूल का पर्दाफाश
जांच में पता चला कि गिरोह बच्चों को झारखंड, राजस्थान और बिहार में दो से पांच लाख रुपये में निसंतान दंपतियों या जरूरतमंद लोगों को बेचता था।
• झारखंड के हजारीबाग से यशोदा देवी एक बच्चे के साथ गिरफ्तार हुई — यह बच्चा विंध्याचल से अगवा किया गया था।
• भीलवाड़ा (राजस्थान) से भंवर लाल पकड़ा गया — उससे सात बच्चों के अपहरण की जानकारी मिली।
पुलिस ने तीन बच्चों को सकुशल बरामद कर उनके परिवारों को सौंपा।




