तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – राजस्थान
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में मासूम बालिकाओं के साथ लंबे समय से एक महिला प्रधानाचार्य की रिश्तेदार गैर-सरकारी बाहरी वार्डन द्वारा देर रात्रि में आना-जाना और मारपीट किए जाने का मामला अत्यंत गंभीर, अमानवीय और शर्मनाक है।
बालिका शिक्षा जैसे पवित्र संस्थान में इस प्रकार की क्रूरता और उसमें विभागीय अधिकारियों एवं जाँच एजेंसी के जांच के घेरे में आई प्रधानाचार्य तथा जो उसके पारिवारिक सदस्य बालिका छात्रावास की वार्डन की संदेहास्पद संलिप्तता, न केवल मानवता पर कलंक है बल्कि राजस्थान की बेटियों के सम्मान के साथ घोर अन्याय भी है।
इस प्रकरण की शिकायत पूर्व में भी कई बार प्रशासन को की गई, परंतु उचित कार्रवाई न होना सरकार की संवेदनहीन कार्यशैली और व्यवस्था की विफलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
बीती रात से लगभग 30 घंटे से अधिक समय से बालिकाएँ, उनके परिजन और स्थानीय जनप्रतिनिधि न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। बालिकाएँ भयभीत और मानसिक रूप से गंभीर सदमे में हैं।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय तथ्य यह है कि प्रशासन पीड़ित बालिकाओं की सुनवाई करने के बजाय, उल्टा उन्हें और उनके परिजनों को मुकदमे दर्ज कर फँसाने की धमकियाँ दे रहा है।
यह संवेदनहीनता नहीं, बल्कि कर्तव्य की घोर अवहेलना और पीड़ितों को दबाने का प्रयास है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होने पर कई गंभीर तथ्य सामने आ सकते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी, आपसे आग्रह है कि इस गंभीर प्रकरण को अविलंब संज्ञान में लेते हुए बालिकाओं द्वारा लगाए गए आरोपों एवं उनकी मांगों पर त्वरित सहमति प्रदान करें, उच्चाधिकारियों की टीम भेजकर बालिकाओं के दर्द और भय को प्रत्यक्ष सुनवाई दें और इस पूरे मामले का शीघ्र खुलासा कर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करें।






