ओबरा डैम परिसर में कोयले की चोरी: बड़ा माफिया संगठित सिंडिकेट हो सकता है जिम्मेदार

तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र जिले के ओबरा डैम परिसर से लगभग चार महीनों से हो रही कोयला चोरी का मामला अब सार्वजनिक और अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। रोजाना कोयले की “एंपटी रैक” सफाई के नाम पर करीब 100 टन कोयले की बिक्री होने, लेकिन पावर प्लांट की आपूर्ति में कोई कमी न दिखने से यह संदेह गहराने लगा है कि यहां कोई बड़ा संगठित माफिया सक्रिय है जो इस चोरी को कानूनी और प्रशासनिक रूप से छिपा रहा है।चोरी की राशि और प्रणाली स्थानीय सूत्र बताते हैं कि पावर प्लांट को कोयला सप्लाई करने वाली रेलवे लाइन के पास शारदा मंदिर के पास एक ऐसा स्थान है जहां कोयले को तौलने के लिए कांटा (वजन मशीन) रखा गया है। यहां से कोयला ईंट भट्टों और विभिन्न अन्य छोटे बड़े खरीदारों तक पहुंचता है। रेलवे के कर्मचारी और मजदूर नागपुर की एक कंपनी का नाम देते हैं जो इस कोयले को वैध ठहराने का काम करती है। इसका मकसद चोरी की तह तक पहुंचने वाली किसी जांच को रोकना बताया जा रहा है।एंपटी रैक और सप्लाई में विसंगति”एंपटी रैक” की सफाई की आड़ में रोजाना लगभग सौ टन कोयले की चोरी हो रही है, लेकिन पावर प्लांट में कोयले की सप्लाई में कोई कमी नजर नहीं आ रही। इसका मतलब यह है कि चोरी गए कोयले के अलावा भी पावर प्लांट को कोयला नियमित और भारी मात्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह तथ्य चार मुख्य बिंदुओं पर सवाल उठाता है:कोयले की वैध भंडारण की वास्तविक स्थिति क्या है?चोरी हुए कोयले का सही आंकलन और विवरण किसके पास है?सप्लाई और बिक्री दोनों में पारदर्शिता क्यों नहीं है?रेलवे व कोयला सप्लाई प्रक्रिया में किस तरह की मिली-भगत है?अधिकारियों और जांच एजेंसियों की भूमिकाकुछ दिन पहले पुलिस ने जेसीबी मशीन और गाड़ियों को जब्त किया था, लेकिन उस कार्रवाई के पश्चात भी चोरी कम होने के बजाय तेज होती नजर आ रही है। अफीशियल जांच एजेंसियों जैसे एपीएफ की अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर कोयला चोरी की अनुमति किस स्तर पर दी जा रही है और क्या इस प्रक्रिया में रेलवे कर्मचारियों, ठेकेदारों और कंपनियों के बीच एक आपसी साजिश या मिलीभगत है।टेंडर और मंजूरी की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभावकोयला की सप्लाई और भंडारण के लिए रेलवे और पावर प्लांट के बीच होने वाली टेंडरिंग प्रक्रिया और मंजूरी की पारदर्शिता संदिग्ध बनी हुई है। जेसीबी सहित अन्य गाड़ियों के जब्ती के बावजूद चोरी का रुकना नहीं, साफ दर्शाता है कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड अभी तक छुपे हुए हैं और उन्हें संरक्षण या सुरक्षा प्राप्त हो रही है।स्थानीय समुदाय की आशंकाएं और सुरक्षास्थानीय लोग इस मामले को लेकर बेहद चिंतित हैं क्योंकि यह न केवल उनके प्राकृतिक संसाधनों की हानि का मामला है, बल्कि क्षेत्र में बढ़ती अपराध रूह और भ्रष्टाचार को भी दर्शाता है। स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शंका जताई जा रही है कि कहीं प्रशासनिक लापरवाही या सांठ-गांठ से यह चोरी तो संभव नहीं हो पा रही।निष्कर्ष: गहन जांच और पारदर्शिता जरूरीओबरा डैम परिसर में कोयले की चोरी का यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है बल्कि यह संगठित अपराध, प्रशासनिक मिलीभगत और आर्थिक भ्रष्टाचार का गहरा विषय है। इस मामले में चार महत्वपूर्ण पहलुओं ‘एंपटी रैक’ की सफाई, कोयले की बिक्री, भंडारण की वास्तविक स्थिति, और पावर प्लांट की कोयले की खपत के बीच मौजूद विसंगति की गहराई से जांच आवश्यक है।अधिकारियों, जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों से आग्रह है कि वे इस केस में छुपे बड़े नेटवर्क का पता लगाकर इस काले धंधे के असली मास्टरमाइंड को सार्वजनिक करें। बिना पूरी पारदर्शिता और कड़ी कार्रवाई के जमीनी स्तर पर चोरी और भ्रष्टाचार को रोक पाना संभव नहीं होगा।इस रिपोर्ट के जरिये स्थानीय समुदाय और अधिकारियों को सचेत किया जा रहा है कि सोनभद्र के प्राकृतिक संसाधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए यह मामला गंभीर है और इसे शीघ्र तथा प्रभावी ढंग से सुलझाना आवश्यक है।

Leave a Comment