तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। घोरावल कोतवाली क्षेत्र के मझिगवां गांव में रविवार की शाम एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना ने पूरे इलाके को सन्नाटे में डुबो दिया। ट्रैक्टर पर लगे तेज रफ्तार पंखे से धान ओसाते समय 36 वर्षीय मंजू देवी की साड़ी फंस गई, जिससे वे गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। परिजनों ने फौरन उन्हें घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने देखते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना से मंजू के परिवार में कोहराम मच गया है।मिली जानकारी के अनुसार, मंजू देवी पत्नी सुरेश प्रजापति ग्राम मझिगवां की रहने वाली थीं। रविवार की शाम वे खेत में ट्रैक्टर पर धान सुखा रही थीं। ट्रैक्टर के पंखे की तेज हवा में धान उड़ाने के दौरान अचानक उनकी साड़ी पंखे में उलझ गई। पंखे की चपेट में आने से मंजू का शरीर बुरी तरह जकड़ गया और वे खून से लथपथ हो गईं। परिजनों ने किसी तरह उन्हें ट्रैक्टर से अलग किया और घोरावल स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी।मंजू के तीन नाबालिग बच्चे—एक पुत्री और दो पुत्र—अब अनाथ जैसे हो गए हैं। परिवार पर दुश्मन का पहाड़ टूट पड़ा है। रोते-बिलखते परिजन शव के पास बैठे चीख रहे थे, जबकि गांव वाले सांत्वना देने पहुंचे। सुरेश प्रजापति का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बताया कि मंजू घर का मुख्य सहारा थीं और रोजगार के लिए खेतों में मेहनत करती थीं। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।घोरावल पुलिस चौकी प्रभारी त्रिभुवन नाथ राय ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर दुर्घटना का अभियोग दर्ज कर लिया गया है। आवश्यक कार्रवाई करते हुए देर शाम करीब सात बजे मंजू के शव को पोस्टमार्टम के लिए सोनभद्र जिला चिकित्सालय भेज दिया गया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।यह घटना ग्रामीण इलाकों में कृषि कार्यों के दौरान होने वाली लापरवाही को उजागर करती है। ट्रैक्टरों पर लगे पंखों का इस्तेमाल धान आदि फसलों को सुखाने के लिए आम है, लेकिन सुरक्षा उपायों की कमी जानलेवा साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ढीले कपड़ों से परहेज, पंखे के आसपास रेलिंग लगाना और जागरूकता ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकती है। सोनभद्र जिले में पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जो किसानों के लिए चेतावनी हैं। स्थानीय प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने होंगे ताकि कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले।






