तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र
जनपद में चल रहे वृक्षारोपण जन अभियान को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने सर्किट हाउस सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वृक्षारोपण में किसी भी
प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में राज्य मंत्री संजीव कुमार गौड़, विधायक भूपेश चौबे, डॉ. अनिल कुमार मौर्य और भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान सड़कों के निर्माण और बिजली परियोजनाओं में वन विभाग से जुड़ी अड़चनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि धार्मिक स्थलों या ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण में वन विभाग से संबंधित कोई बाधा आती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था से आवेदन लेकर उसे “प्रवेश पोर्टल” के माध्यम से तत्काल निस्तारित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में नियमित बैठकें कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास कार्यों में कोई देरी न हो।
वृक्षारोपण अभियान की समीक्षा करते हुए मंत्री का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। सभी अधिकारियों को फील्ड में जाकर स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि कम से कम तीन फीट ऊंचे पौधे ही लगाए जाएं, ताकि उनके जीवित रहने की संभावना अधिक हो। साथ ही उन्होंने महुआ, चिरौंजी और अन्य फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका को भी मजबूती मिल सके।
बैठक में महुआ व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने साफ निर्देश दिया कि महुआ विक्रेताओं के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई न की जाए और उनके हितों का ध्यान रखा जाए।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़कों पर फ्लाई ऐश किसी भी स्थिति में न फैले, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जाए। प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ-साथ कंपनियों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया।
कुल मिलाकर, इस समीक्षा बैठक से साफ संदेश गया है कि सरकार अब वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय है, जबकि जिम्मेदारी निभाने वालों को ही आगे मौका मिलेगा।






