लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र मां अमिला भवानी धाम, फिर भी बिजली व्यवस्था से वंचित

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़-(मुन्ना लाल जायसवाल)

कोन(सोनभद्र)। जिले का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां अमिला भवानी मंदिर जहां चैत्र नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। हैरानी की बात यह है कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और धार्मिक महत्व के बावजूद मंदिर परिसर एवं पहुंच मार्ग पर अब तक बिजली का एक स्थायी पोल तक नहीं लगाया जा सका है।
नवरात्र मेले के दौरान दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लेकिन शाम ढलते ही मंदिर क्षेत्र और मार्गों पर अंधेरा छा जाता है, जिससे श्रद्धालुओं, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से मंदिर क्षेत्र में बिजली और प्रकाश व्यवस्था की मांग उठती रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।
सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार साहनी ने कहा कि मां अमिला भवानी धाम पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। लाखों श्रद्धालु यहां माथा टेकने आते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब अन्य धार्मिक स्थलों पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं, तब इतने महत्वपूर्ण धाम की उपेक्षा समझ से परे है। प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेते हुए मंदिर तक जाने वाले मार्गों पर विद्युत पोल और स्थायी प्रकाश व्यवस्था की व्यवस्था करनी चाहिए।
वहीं मंदिर समिति के अध्यक्ष नवलेश कुमार गौड़ ने कहा कि मंदिर की ख्याति लगातार बढ़ रही है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद आज तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति की ओर से कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “मां अमिला भवानी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए प्रकाश व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। सरकार और प्रशासन को इस दिशा में प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना चाहिए।”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि मंदिर परिसर और संपर्क मार्गों पर बिजली एवं स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था हो जाए तो श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर कब आस्था के इस प्रमुख केंद्र से अंधेरे का साया हटेगा।

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