गरीब सब्जी विक्रेताओं की रोज़ी-रोटी बचाने के लिए उठी आवाज़, व्यापार मंडल व सेवा ही संकल्प टीम ने अधिकारियों से की वार्ता

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – राकेश केसरी

ओबरा / सोंनभद्र

पिछले एक सप्ताह से ओबरा मार्केट में छोटे सब्जी विक्रेताओं की दुकानें बंद होने के कारण सैकड़ों गरीब परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। वर्षों से रेहड़ी-पटरी पर सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले मेहनतकश लोगों की आजीविका ठप होने से उनके घरों में आर्थिक तंगी गहराती जा रही है।इस गंभीर समस्या को लेकर व्यापार मंडल के प्रतिनिधि गौरव जैन,अभिषेक तथा सेवा ही संकल्प टीम के राकेश केशरी ने ओबरा तापीय परियोजना के अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को गरीब सब्जी विक्रेताओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए मानवीय एवं न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की, ताकि उनकी दुकानें पुनः संचालित हो सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल दुकान लगाने का मामला नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका, उनके बच्चों की शिक्षा और दो वक्त की रोटी का प्रश्न है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो अनेक परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।बैठक में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा गरीबों, मजदूरों एवं छोटे व्यापारियों के कल्याण के लिए चलाई जा रही जनहितकारी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सरकार की मंशा किसी गरीब की रोज़ी-रोटी छीनने की नहीं हो सकती। शासन की भावना के अनुरूप स्थानीय स्तर पर भी ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे व्यवस्था भी बनी रहे और गरीबों का रोजगार भी सुरक्षित रहे।सेवा ही संकल्प टीम ने स्पष्ट कहा कि गरीब, मजदूर और छोटे व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। जब तक सब्जी विक्रेताओं को न्याय नहीं मिलता, तब तक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से उनकी आवाज़ बुलंद की जाती रहेगी।इस दौरान सुलोचना गुप्ता, नौसाद, ममता, शंकर, कृष्णा, दया, दीपक, संदीप, मोहित, अनस, सोनू, भिखारी, रामधारी तथा सरोज सहित अनेक सब्जी विक्रेता उपस्थित रहे। सभी ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखते हुए प्रशासन से गरीब परिवारों की आजीविका बचाने की अपील की।गरीब का सम्मान, उसकी मेहनत और उसकी रोज़ी-रोटी की रक्षा करना ही सच्ची जनसेवा है। एक संवेदनशील व्यवस्था वही है जो समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का हाथ थामकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दे।

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