मलिन बस्ती पहुंचे डीएम-एसपी, हाईकोर्ट के आदेशों से कराया अवगत, पैरवी का दिया अंतिम मौका

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

डाला/सोनभद्र। डाला स्थित मलिन बस्ती में शनिवार को उस समय हलचल मच गई, जब जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा का संयुक्त काफिला अचानक बस्ती पहुंच गया। अधिकारियों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। प्रशासन की ओर से लोगों को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेशों की विस्तार से जानकारी दी गई और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए समय रहते न्यायालय में अपनी पैरवी करने की अपील की गई।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि भूखंड गाटा संख्या 113 से 179 के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किए गए हैं। ऐसे में जिन लोगों का इस भूमि से किसी प्रकार का दावा या पक्ष जुड़ा हुआ है, वे निर्धारित समयावधि के भीतर न्यायालय में अपनी बात अवश्य रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश सर्वोपरि हैं और जिला प्रशासन का दायित्व उनका विधिसम्मत पालन सुनिश्चित कराना है।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन की मंशा किसी के साथ अन्याय करना नहीं है, बल्कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
पुलिस अधीक्षक ने भी उपस्थित लोगों से शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कानून हाथ में लेने या भ्रामक सूचनाओं के आधार पर कोई कदम उठाने से बचें। यदि किसी को किसी प्रकार की जानकारी या सहायता की आवश्यकता हो तो वह प्रशासन से सीधे संपर्क कर सकता है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मलिन बस्ती की स्थिति का भी जायजा लिया तथा स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की प्रक्रिया पूरी तरह कानून के दायरे में और पारदर्शिता के साथ की जाएगी।
प्रशासन की इस पहल को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल रहा। अधिकारियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बस्तीवासियों से एक बार फिर अपील की गई कि वे निर्धारित समय के भीतर न्यायालय में अपनी पैरवी सुनिश्चित करें, क्योंकि समयसीमा समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन को न्यायालय के आदेशों का अनुपालन कराना अनिवार्य होगा।

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