तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र ब्यूरो।
जनपद में कोयला परिवहन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। झारखंड स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की खदानों से रेलवे रैक के माध्यम से कृष्णशिला रेलवे साइडिंग पहुंचने वाले कोयले की सड़क मार्ग से ढुलाई के दौरान जिला पंचायत द्वारा परिवहन शुल्क वसूली का मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को लेकर ऊर्जाचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन खुलकर मैदान में उतर आया है और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
गुरुवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष पप्पू सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं ट्रक मालिकों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए कि जिला पंचायत के ठेकेदार एवं उसके कर्मचारी मालवाहक वाहनों को बीच रास्ते में रोककर जबरन परिवहन शुल्क वसूल रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल परिवहन कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि ट्रांसपोर्टरों का आर्थिक शोषण भी किया जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया कि सीसीएल की खदानों से रेलवे रैक द्वारा कृष्णशिला रेलवे साइडिंग तक पहुंचने वाला कोयला पहले से निर्धारित व्यवस्था के तहत सड़क मार्ग से विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में परिवहन के दौरान अतिरिक्त शुल्क वसूली का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके बावजूद कथित रूप से जिला पंचायत के नाम पर शुल्क की मांग कर ट्रकों को रोका जा रहा है, जिससे परिवहन व्यवस्था बाधित हो रही है।
एसोसिएशन का आरोप है कि कई बार वाहन चालकों से दबाव बनाकर धनराशि वसूली जाती है। विरोध करने पर ट्रकों को रोकने और परिवहन कार्य बाधित करने की चेतावनी भी दी जाती है। इससे वाहन मालिकों और चालकों में भारी असंतोष व्याप्त है तथा कोयला आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
पप्पू सिंह ने कहा कि यदि यह स्थिति बनी रही तो ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ेगा और हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसपोर्टर नियमों के तहत सभी वैधानिक कर एवं शुल्क का भुगतान करते हैं। ऐसे में अतिरिक्त परिवहन शुल्क की मांग पूरी तरह अनुचित है। यदि प्रशासन शीघ्र समाधान नहीं करता है तो एसोसिएशन आगे की रणनीति तय करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की होगी।
उधर, इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। सभी की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच के बाद क्या निर्णय लिया जाता है और ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।






