सोनभद्र में शिक्षा की डिजिटल क्रांति, 900 सरकारी स्कूलों में गूंज रही स्मार्ट क्लास

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र ब्यूरो।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार नए प्रयोग कर रही है। इसी क्रम में आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र के सरकारी विद्यालयों में शुरू हुई स्मार्ट क्लास व्यवस्था अब शिक्षा की नई मिसाल बनती जा रही है। जिले के 10 विकास खंडों के करीब 900 परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा की शुरुआत होने के बाद सरकारी स्कूलों का माहौल पूरी तरह बदल गया है। अब बच्चे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एनीमेशन, वीडियो, चित्रों और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से विषयों को आसानी से समझ रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट टीवी आधारित शिक्षण व्यवस्था लागू होने से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति उत्साह पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। कक्षाओं में बच्चों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है और शिक्षक भी आधुनिक तकनीक के सहारे पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बना रहे हैं। विशेष रूप से गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषय अब बच्चों के लिए कठिन नहीं बल्कि मनोरंजक बनते जा रहे हैं।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि प्रदेश सरकार और संपर्क फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से विद्यालयों में एसटीवी (Smart TV) डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें नई शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के अनुरूप एनसीईआरटी एवं एससीईआरटी द्वारा अनुमोदित डिजिटल शैक्षणिक सामग्री पहले से ही लोड है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था बिना इंटरनेट के भी संचालित होती है, जिससे दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के विद्यालय भी तकनीकी शिक्षा से जुड़ सके हैं।
डिजिटल कंटेंट के माध्यम से बच्चों को कठिन विषयों को सरल भाषा और आकर्षक एनीमेशन के जरिए समझाया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों की समझने की क्षमता, याद रखने की शक्ति और आत्मविश्वास में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। शिक्षकों का भी मानना है कि स्मार्ट क्लास शुरू होने के बाद बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और कक्षा में उनका ध्यान पहले से अधिक केंद्रित रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल किसी बड़े बदलाव से कम नहीं है। जहां पहले संसाधनों की कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा बनती थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से गांवों के बच्चे भी शहरों जैसी डिजिटल शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्मार्ट क्लास व्यवस्था भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि बच्चों में डिजिटल जागरूकता भी विकसित होगी, जो आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
सरकार और संपर्क फाउंडेशन की इस पहल ने सोनभद्र के सरकारी विद्यालयों को नई पहचान दिलाई है। शिक्षा के क्षेत्र में हो रहा यह डिजिटल परिवर्तन अब जिले के हजारों बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रहा है। यदि इसी गति से तकनीकी संसाधनों का विस्तार होता रहा तो आने वाले वर्षों में सोनभद्र प्रदेश के डिजिटल शिक्षा मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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