॥ॐ॥ देवशयनी एकादशी विशेष ॥ॐ॥

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तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – विष्णु गुप्ता

देवशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. पुराणों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं. ये एकादशी आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. इस बार देवशयनी एकादशी २० जुलाई २०२१ को दिन मंगलवार को मनाई जाएगी. देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु का शयन काल माना जाता है. इसी दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता हैं और अगले चार महीनों तक किसी भी मांगलिक कार्य पर रोक लग जाती है. ये एकादशी आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. ● देवशयनी एकादशी का महत्व: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं. इसलिए इस मास को चतुर्मास भी कहा जाता है. इस दिन से भगवान शिव संसार का संचालन करते हैं. इस दिन से सभी मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है. इसके बाद देवउठनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं. देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है. इस दिन भगवान विष्णु का शयनकाल आरंभ होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि से ही भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम के लिए प्रस्थान करते हैं. भगवान विष्णु का शयनकाल देवउठनी एकादशी को समाप्त होता है.

देवशयनी एकादशी से जुडी कथा :
पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में मांधाता नाम का एक प्रतापी राजा रहता था, उनकी चर्चा तीनों लोक में थी. एक बार की बात है जब उनके राज में अकाल पड़ा गया. इसका उपाय ढूढ़ते ढूढ़ते राजा मांधाता अपनी सेना के साथ वन की ओर निकल गए. वन में भटकते हुए वो अंगिरा ऋषि के आश्रम जा पहुंचें. उन्होंने अंगिरा ऋषि से अपनी समस्या के बारे में बताया. राजा ने विनम्रता पूर्वक कहा कि मैं किसी प्रकार के पापकर्म में संलिप्त नहीं हूं. प्रजा की हमेशा भलाई का ही कार्य करता हूं.फिर भी जाने किस अपराध के कारण राज्य में भयावह अकाल पड़ गया है. कृपा करके आप कोई युक्ति बताएं.
ऋषि अंगिरा ने कहा की, राजन, सतयुग में धर्म-कर्म का विशेष महत्व है. अगर आप अधर्मी हो जाते हैं या अंजाने में भी कोई पाप कर्म करते हैं तो आपको इस पाप कर्म दंड जरूर मिलेगा. या फिर किसी प्रजाजन के द्वारा को पाप कर्म किया जा रहा हो. जिसका दण्ड सबको भुगताना पड़ रहा है. ऋषि अंगिरा ने राजा मांधाता को देवशयना एकादशी के व्रत रखने का परामर्श दिया और कहा कि इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है.भगवान विष्णु की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं. ऋषि अंगिरा के वचनानुसार राजा मांधाता ने देवशयनी एकादशी का व्रत रखा, फलस्वरूप उनके राज्य में बारिश हुई और प्रजा को अकाल से मुक्ति मिली. ||

ॐ नमो: भगवते वासुदेवाय ||

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ||

श्रीमन नारायण विश्वरूपदर्शन ||

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