आस्था का महापर्व छठ उगते हुए सूर्य देव को अर्ध्य छठ व्रत धारियों द्वारा देकर हुआ संपन्न

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – इब्राहिम खान

दुद्धी – सोनभद्र

दुद्धी तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर हो रहे छठ पूजा की चार दिवसीय कठिन पूजा अनुष्ठान का त्यौहार गुरुवार की प्रातः उगते सूर्य को अर्ध्य देकर,सभी के लोक मंगल की कामना के साथ सम्पन्न हुआ। बुधवार की शाम से ही क्षेत्र की सभी -तालाब एवं नदियों के घाट पर छटब्रतधारी श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगने लगा था।परिवार की सुख-समृद्धि एवं मनोवांछित फल प्रदान करने वाले इस महापर्व पर श्रद्धालुओं ने बुधवार की शाम डूबते हुए भगवान भाष्कर देव को अर्ध्य दिया और रात्रि जागरण कर छठ मैया गीतों से घाटों पर गुजरात रहा।कुछ श्रद्धालु महिलाएं अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए कड़कड़ाती ठंड में तालाब में खड़े होकर,चार से पांच घंटे तक भगवान भाष्कर की आराधना में ध्यानमग्न रहीं। गुरुवार की प्रातः सूर्योदय होते ही घाटों पर एक बार फिर श्रद्धालुओं द्वारा आराध्य देव को अर्ध्य देने का सिलसिला शुरू हुआ,जो घंटो चला।इस दौरान ब्रतधारियों द्वारा पुत्र,पति, ब्राम्हण आदि परिजनों से दुध का अर्ध्य लेकर,भगवान सूर्य देवता की उपासना की गयी और इसी के साथ महापर्व का समापन हुआ।
घाट से निकल रहे ब्रतधारियों द्वारा सभी पूजा आयोजन समिति व सहयोगी योग के द्वारा उनको महाप्रसाद देने का दौर चलता रहा।उधर पूरी रात पंचदेव मंदिर दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में देवी जागरण का भव्य आयोजन किया गया।जिसमें श्रोता पूरी रात भक्तिरस झूमते रहे आपको बतादें कि सूर्योपासना के इस महान पर्व में साफ-सफाई का बड़ा ही महत्व है।ब्रतधारी पुरूष महिलाएं चार दिन इस ब्रत में शुद्धता वह बड़े ही अनुष्ठान का पूरा ख्याल रखते हैं।सूर्योपासना का यह महान पावर पर्व सूर्य षष्ठी को मनाया जाता है।जिस कारण इसका नामकरण छठ पड़ा। यह पर्व परिवार में सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि छठी देवी भगवान सूर्य की बहन हैं, इसलिए लोग सूर्य की तरफ अर्घ्य दिखाते हैं और छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना करते हैं। ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का अधिपति माना गया है। सभी ग्रहों को प्रसन्न करने के बजाय अगर केवल सूर्य की ही आराधना की जाए और नियमित रूप से अर्घ्य दिया जाए तो कई लाभ मिल सकते हैं।इसके वैज्ञानिक लाभ भी हैं।अगर सूर्य को जल देने की बात करें तो इसके पीछे रंगों का विज्ञान छिपा है।
मानव शरीर में रंगों का संतुलन बिगड़ने से भी कई रोगों के शिकार होने का खतरा होता है। सुबह के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय शरीर पर पड़ने वाले प्रकाश से ये रंग संतुलित हो जाते हैं। जिससे शरीर की प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है। सूर्य की रौशनी से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में पूरा होता है। त्वचा के रोग कम होते हैं।इस घाट पर होने वाली ऐतिहासिक भीड़ का व्यवस्थापन जिम्मेदारी जेबीएस उठाती चली आ रही है, जिसका सहयोग नगर पंचायत, रामलीला कमेटी,दुर्गा पूजा समिति आदि सामाजिक एवं धार्मिक संगठनें कंधा से कंधा मिलाकर करती हैं।इसके अतिरिक्त मां काली सेवा समिति एवं जय हिंद क्लब द्वारा खीर एवं प्रसाद वितरण तथा विकास क्लब द्वारा घाट की साज सज्जा में फूल-मालाओं का विशेष सहयोग दिया गया।

इसके अलावा क्षेत्र के लवकुश मंदिर बीड़र हीरेश्वर मंदिर , कनहर, जाबर,रजखड़, खजुरी समेत दर्जनों स्थानों के घाटों पर धूमधाम से छठ मनाया गया।सुरक्षा की जिम्मेदारी कोतवाल राघवेंद्र सिंह ने संभाल रखी थी।एसडीएम रमेश कुमार एवं सीओ रामआशीष यादव घाटों पर चक्रमण कर व्यवस्था पर नजर रखे रहे। विधायक हरीराम चेरो ने घाट पर पहुंचकर दर्शन पूजन किया और 21000 रुपये की सहयोग राशि की घोषणा करते हुए,आयोजन कमेटी को बधाई दी।

कार्यक्रम में जेबीएस अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रहरि, सचिव सुरेंद्र कुमार गुप्ता,चेयरमैन राजकुमार अग्रहरि,ईओ भारत सिंह,कमल कानू, पंकज कुमार बुल्लू, अनिल कुमार, दीपक शाह,प्रदीप कुमार, पवन सिंह समेत सभी धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।

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