प्रियंका गांधी आज महोबा में खंगालेंगी पुराने रिश्ते

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –

कानपुर विस्तार/ ब्यूरो महेंद्र राज शुक्ल

बुंदेलखंड में सियासी जमीन तलाश रहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी चित्रकूट के बाद अब महोबा में पुराने रिश्तों से हाथ को मजबूत करने आ रही हैं। महोबा में 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम के बाद अब कांग्रेस भी बुंदेल खंड को साधने की तैयारी में है। शनिवार को प्रियंका यहां आयोजित प्रतिज्ञा रैली में कांग्रेस के पुराने इतिहास और रिश्तों के सहारे पार्टी के पंजे को मजबूत करने की कोशिश करेंगी और ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ के नारे के साथ आधी आबादी के हक की आवाज उठाएंगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव इस रैली में प्रधानमंत्री की जानसभा में कहे गये वक्तव्य परिवारवाद के हमले का भी जवाब दे सकती हैं। वह महिलाओं से संवाद के जरिए सीधे जुड़ाव बनाते हुए जनता के दिल तक पहुंचने का प्रयास भी करेंगी।
प्रियंका छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ पहले मध्य प्रदेश के खजुराहो विमान से पहुंचेंगी। वहां से दोपहर एक बजे महोबा के लिए हेलीकाप्टर से प्रस्थान करेंगी। 1.30 पर महोबा के छत्रसाल स्टेडियम पहुंचेंगी। यहां प्रतिज्ञा रैली को संबोधित करने के साथ महिलाओं से संवाद का कार्यक्रम भी है। रैली के बाद 3.35 पर खजुराहो के लिए प्रस्थान कर जाएंगी। महोबा कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष तुलसीदास लोधी ने बताया कि प्रतिज्ञा रैली और महिलाओं से संवाद के कार्यक्रम की तैयारी हो चुकी है।महोबा से कांग्रेस का रिश्ता पुराना है।
महोबा को आल्हा-ऊदल की नगरी के नाम से तो जाना ही जाता है, यह चंदेल शासकों से लेकर आजादी की लड़ाई का भी प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पर महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, अब्दुल गफ्फार खां , लाल बहादुर शास्त्री आदि ने जंगे आजादी का बिगुल फूंका था। चरखारी निवासी 72 वर्षीय चंद्रिका प्रसाद मिश्र बताते हैं कि जैतपुर के ग्राम मुढ़ारी में करीब 1965 में ग्रामवासियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के गांव आने पर उनका चांदी से तुलादान किया था। छविलाल और मथुरा प्रसाद के नेतृत्व में गांव के बाहर इंदिरा गांधी के नाम पर ग्राम का प्रवेश द्वार बनाया गया था। 1952 में अस्तित्व में आई विधानसभा सीट महोबा में कांग्रेस का दबदबा रहा है। अब तक 17 बार हुए चुनाव में छह बार कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा है। 1996 से इस सीट पर लगातार सपा और बसपा का दो-दो बार कब्जा रहा है। 1989 के बाद से कांग्रेस महोबा में एक जीत के लिए तरस रही है।

Leave a Comment