जंगल बचाने के लिए ग्रामीणों ने किया बैठक

ग्रामीणों द्वारा जप्त हरी लकड़ियां,जंगल बचाव के लिए बैठक करते मुखिया एवं ग्रामीण

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –

केतार से प्रदीप चन्द्रवंशी की रिपोर्ट

केतार :
प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों वनों की कटाई जोरों पर चल रहा है. प्रतिदिन सुबह होते ही भगवान घाटी, पिपरा टाड़ी, खोन्हर नारायण वन, अमराही दह,राजघाटी,भैंसहट, बजरिवाशीला, बघमनवा, दक्षिणी पहाड़ी एवं बतोकला के जंगलों से सैकड़ों बोझा हरी लकड़ियों की कटाई हो रही है. यहाँ से प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में ग्रामीण लकड़िया ले जाते हैं. जिसे बड़ी आसानी से सुबह के समय इन पहाड़ियों से सटे सड़कों से गुजरते हुये दिखा जा सकता है. इसके बावजूद भी वन विभाग निष्क्रिय बनकर बैठी हुई है. वनों की कटाई को रोकने के लिये कोई पहल नहीं की जा रही है. ईधर अपने आसपास के जंगलों को गुजरते हुये लकड़हारों को देख अमवाडीह गांव के बुद्धिजीवी जंगलों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित है. यहाँ थक हार कर ग्रामीणों ने ही अंततः जंगल को बचाने का बीड़ा उठाया है. यहां ग्रामीणों की एक दल ने बघमनवा के जंगल से लकड़ियों की कटाई कर ले जा रहे 36 बोझा लकड़ी जप्त किया है. जिसके बाद मुखिया चंद्रदेव उरांव,नागेंद्र प्रजापति, चमन साह की उपस्थिति में ग्रामीणों की बैठक हुई. जिसमें निर्णय लिया गया कि वर्तमान वन समिति को तत्काल भंग किया जाय तथा ग्रामीणों के द्वारा पकड़े गये लकड़हारों की सूची वन विभाग को कार्रवाई हेतु सौंपी जाय.
क्या कहते हैं रेंजर
इस संबंध में रेंजर प्रमोद कुमार ने बताया कि अधिकरियों को भेज कर देखवाते हैं.
रसोई गैस के बढ़े दाम का सीधा असर
इधर लकड़ी काटने वाले ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि लकड़ी नहीं काटेंगे तो खाना कैसे बनेगा ? रसोई गैस काफी महंगी है. जिसके कारण हम सबों को मजबूरी में लकड़ी से भोजन तैयार करना पड़ता है. उल्लेखनीय है कि रसोई गैस के दाम वर्तमान में 957 रु है. गैस की बढ़ी हुई दाम का असर सीधे यहाँ के गरीबों पर पड़ रहा है. केतार स्थित बगलामुखी भारत गैस एजेंसी के उपभोक्ताओं की संख्या 8100 है. इसके विरुद्ध इस माह गैस रिफिल करने वालो की संख्या महज 861 ही है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उज्जवला योजना के लाभुकों पर इसका कितना असर पड़ा है.

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