तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – प्रदीप दुबे
गाजीपुर। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वाधान में तथा जनपद न्यायाधीश के आदेशानुसार 22 मार्च 2022 को वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण अधिनियम 2007 के तहत विधिक साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा विधिक जानकारी दी गई। इस अवसर पर पूर्णकालिक सचिव कामायनी दूबे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वृद्धजन आवास/वृद्धाश्रम की पूर्णतयाः जानकारी ली तथा परिसर में साफ-सफाई रखने हेतु प्रबंधक श्रीमती ज्योत्सना को निर्देशित किया गया।
इस दौरान सचिव ने बालिका शिशु के महत्व और भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना उनके स्वास्थ्य, सम्मान, शिक्षा, पोषण आदि से जुडे़ मुद्दों तथा पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भू्रण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोडे़ या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है के बारे में चर्चा की गयी। बुजुर्गो के अधिकारों के बावत बताया कि माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत अभिभावक एवं वरिष्ठ नागरिक जो कि अपने आय अथवा अपनी संपत्ति के द्वारा होने वाली आय से भरण-पोषण करने में असमर्थ है। वे अपने व्यस्क बच्चों अथवा ऐसे संबंधितों से भरण-पोषण करने हेतु आवेदन कर सकते है तथा वृद्धा पेंशन एवं विधवा पेंशन के विषय में बताया गया।
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