हज़ारों का सामान खाक आरोपी अराजक तत्वों की तलाश में पुलिस सक्रिय

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तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

गुरमा/सोनभद्र। चोपन थाना क्षेत्र के सलखन ग्राम पंचायत के मुनगा टोला में शनिवार की देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। कुछ अराजक और शरारती तत्वों ने एक निरीह, गरीब एवं अल्पसंख्यक समुदाय की महिला की दुकान गोमती को अपना निशाना बनाते हुए उसमें आग लगा दी। खास बात यह कि घटना को अंजाम देने से पहले आरोपी महिला के घर के मुख्य दरवाज़े पर बाहर से कुण्डी चढ़ाकर भाग निकले, जिससे पीड़ित परिवार अंदर बंद रह गया और बाहर की घटना से पूरी तरह अनजान रहा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नाज़मा बेगम, पत्नी जुल्फेकार ख़ाँ, रोज़ की तरह रात में खाना खाकर सो गई थीं। बताया गया कि तकरीबन रात 12 बजे के बाद कुछ असामाजिक तत्व चुपके से उनके घर पहुंचे और पहले दरवाज़े को बाहर से बंद कर दिया। इसके बाद घर के सामने स्थित उनकी गोमती दुकान में आग लगा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और दुकान में रखा सारा जनरल सामान, रोजमर्रा की वस्तुएं, किराना सामग्री से लेकर सिंगार का पूरा स्टॉक जलकर राख हो गया।

पीड़िता ने बताया कि हाल ही में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर लगभग 50 हजार रुपये का नया सामान भरवाया था, जबकि पुराना सामान और गोमती की कीमत मिलाकर करीब 25 हजार रुपये का और नुकसान हो गया। कुल मिलाकर महिला को लगभग 75 हजार रुपये से अधिक की आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। आग की लपटों और धुएं को देखकर आसपास के लोग जुटे और किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

घटना की जानकारी होते ही पीड़िता के परिजनों ने तुरंत इलाकाई पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस अराजक तत्वों की पहचान करने में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना सुनियोजित प्रतीत होती है और आरोपी महिला की आर्थिक स्थिति तथा उसकी दुकान को देखकर उसे निशाना बनाया गया है।

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता एवं मुआवज़े की मांग करते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गुहार लगाई है। वहीं ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और सभी ने मिलकर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग उठाई है।
सलखन में घटी यह वारदात न सिर्फ कानून व्यवस्था को चुनौती देती है, बल्कि गरीब परिवारों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती घटनाओं पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और जिला प्रशासन कितनी शीघ्रता से पीड़िता को न्याय दिला पाता है।

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