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रिपोर्ट – केतार से प्रदीप चन्द्रवंशी
केतार (गढ़वा): प्रखंड के बलीगढ़ गांव में आज एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते बाल-बाल बच गया। गांव के निवासी विनोद बैठा के घर के समीप से गुजर रही सरकारी जलापूर्ति/सिंचाई परियोजना की मुख्य पाइपलाइन अचानक तेज प्रेशर के साथ लीक हो गई। पानी का दबाव इतना भयानक था कि उसकी चपेट में आने से तीन स्थानीय ग्रामीण बाल-बाल बच गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते लोग वहां से पीछे नहीं हटते, तो आज कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी।
विनोद बैठा के घर के पास मची अफरा-तफरी, जीना हुआ मुहाल
लीकेज के बाद पाइपलाइन से इतनी तीव्र गति और प्रेशर से पानी का फव्वारा छूटा कि आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया। पानी सीधे विनोद बैठा के घर और परिसर में इतनी तेजी से घुसने लगा कि परिजनों का घर में रहना और सांस लेना तक मुश्किल हो गया। अचानक आए इस जल-तांडव से पूरे बालीगढ़ गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कंपनी की कार्यशैली और घटिया निर्माण पर गंभीर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य करने वाली कंपनी और संबंधित विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
बार-बार हो रही है लीकेज: यह कोई पहली घटना नहीं है। इस रूट पर पाइपलाइन पहले भी कई जगहों पर बार-बार लीक हो चुकी है, जिससे साफ पता चलता है कि वेल्डिंग और जॉइंट्स का काम बेहद घटिया स्तर का किया गया है।
सामग्री की गुणवत्ता खराब: आबादी वाले क्षेत्र और रिहायशी घरों के इतने करीब से गुजरने वाली हाई-प्रेशर पाइपलाइन में बेहद कमजोर और निम्न स्तर के मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: बिना उचित टेस्टिंग और सुरक्षा घेरे (Safety Barrier) के आबादी के बीच इतना भारी वाटर प्रेशर छोड़ दिया गया, जिसपर प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
जल जीवन मिशन या सिंचाई परियोजना? जांच की मांग
शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह पाइपलाइन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DWSD) की ‘जल जीवन मिशन’ या फिर जल संसाधन विभाग की किसी बड़ी सिंचाई परियोजना के तहत बिछाई गई है। ग्रामीण अब इस पूरे प्रोजेक्ट और इसमें शामिल ठेकेदार/कंपनी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।






