केतार: ‘शांति धाम’ बना शराबियों का अड्डा, श्मशान घाट पर बिखरी कांच की बोतलें दे रही हैं हादसों को दावत

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज –

रिपोर्ट – केतार से प्रदीप चन्द्रवंशी

केतार : जिस जगह को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और अंतिम विदाई का स्थान माना जाता है, जहाँ लोग भारी मन और श्रद्धा के साथ अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं, वह स्थान आज असामाजिक तत्वों की वजह से अपवित्र हो रहा है। हम बात कर रहे हैं केतार प्रखंड मुख्यालय स्थित श्मशान घाट की, जो इन दिनों शराबियों का महफूज ठिकाना बन चुका है।
यहाँ हर तरफ शराब की खाली बोतलें और उनके टूटे हुए टुकड़े बिखरे पड़े हैं। यह स्थिति न केवल इस पवित्र स्थान का अपमान है, बल्कि यहाँ आने वाले लोगों के लिए एक बड़ा खतरा भी बन चुकी है।
पैदल चलना भी हुआ दूभर, आस्था पर गहरी चोट
अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोग अक्सर नंगे पैर श्मशान घाट तक जाते हैं। लेकिन आज केतार के श्मशान घाट की स्थिति ऐसी है कि बिना जूते-चप्पल के पैर रखना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है। शराब पीने के बाद असामाजिक तत्व बोतलों को वहीं पत्थरों पर तोड़ देते हैं। कांच के ये नुकीले टुकड़े मिट्टी में धंसे हुए हैं, जिससे आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। क्या हमारे समाज की संवेदना इतनी मर चुकी है कि हम श्मशान जैसी जगह की मर्यादा भी भूल गए हैं?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से तीखे सवाल: चुनाव खत्म, तो क्या जिम्मेदारी भी खत्म?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल हमारे स्थानीय जनप्रतिनिधियों (मुखिया, जिला परिषद सदस्य और अन्य नेताओं) पर उठता है। जनता जानना चाहती है:
माननीय प्रतिनिधि जी, क्या आपकी नजरें इस बदहाली पर नहीं पड़ती? क्या आपका काम सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगना और बड़े-बड़े वादे करना है?
श्मशान घाट की सुरक्षा और घेराबंदी क्यों नहीं? इस पवित्र स्थल की बाउंड्री वॉल या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आज तक क्यों नहीं किए गए, ताकि असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर रोक लग सके?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है? अगर श्मशान घाट पर बिखरे कांच से कोई व्यक्ति गंभीर रूप से लहुलुहान हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—प्रशासन या आप?
कड़वा सच: “वोट बैंक की राजनीति में श्मशान और कब्रिस्तान के नाम पर राजनीति तो खूब होती है, लेकिन जब धरातल पर उनके रखरखाव और गरिमा को बनाए रखने की बात आती है, तो जनप्रतिनिधि अपनी आँखें मूंद लेते हैं।

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