ओबरा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर CISF ने मनाया भव्य कार्यक्रम

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज –किरण साहनी

सोनभद्र, ओबरा। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) इकाई, ओबरा तापीय विद्युत परियोजना (OTHPP) परिसर में शुक्रवार को एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत इस कार्यक्रम में CISF के जवानों व तापीय परियोजना के श्रमिकों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन किया, जिससे संपूर्ण परिसर में राष्ट्रप्रेम की गूंज व्याप्त हो उठी।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इकाई के कमांडेंट सतीश कुमार सिंह ने इस अवसर पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है, जिसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा प्रदान की। उन्होंने बताया कि बंगाल के महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ की रचना की थी। यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था और बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया।कमांडेंट सिंह ने ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अरविंद घोष ने 16 अप्रैल 1907 को अंग्रेजी दैनिक ‘बंदे मातरम’ में लिखा था कि बंकिम बाबू ने इस गीत की रचना 32 वर्ष पूर्व की थी। उन्होंने कहा कि 1907 में जर्मनी के स्टटगार्ट में मैडम भीकाजी कामा द्वारा पहली बार विदेश में फहराए गए भारतीय तिरंगे पर भी ‘वंदे मातरम’ अंकित था, जिससे यह गीत भारतीय एकता और स्वदेशी आंदोलन का प्रबल प्रतीक बन गया।सतीश कुमार सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को कहा था कि ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ की भांति ही सम्मान मिलना चाहिए। यह गीत आज भी हर भारतीय के मन में देशप्रेम, त्याग और गौरव की भावना जगाता है।समारोह के दौरान ओबरा तापीय परियोजना के अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में CISF के जवान उपस्थित रहे। देशभक्ति गीतों से वातावरण गूंज उठा और लोगों ने जोश एवं गर्व के साथ तिरंगे को नमन किया। समारोह का समापन राष्ट्रगौरव और एकता के संदेश के साथ हुआ।

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