वर्षों से जर्जर डाला-ओबरा मार्ग पर उबले लोग, महा पदयात्रा से पहले पहुंचे अधिकारी — जल्द समाधान का मिला आश्वासन

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी 

सोनभद्र। डाला-ओबरा मार्ग की बदहाल स्थिति से परेशान स्थानीय नागरिकों का गुस्सा आखिर शनिवार को फूट पड़ा। लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही न होने से नाराज ग्रामीणों ने महा पदयात्रा निकालने की घोषणा की थी। जैसे ही लोग पदयात्रा के लिए एकत्र हुए, मौके पर पहुंचे डाला चौकी प्रभारी आशीष पटेल ने लोगों को शांत कर कार्यक्रम टालने का अनुरोध किया।सूचना पर ओबरा के एसडीएम विवेक कुमार सिंह स्वयं डाला-ओबरा मार्ग स्थित सेक्टर बी चौराहे पर पहुंचे और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। इस दौरान लोगों ने वर्षों से जर्जर सड़क की समस्या और उससे हो रही परेशानियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। एसडीएम ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि जल्द ही इसका स्थायी समाधान कराया जाएगा। उन्होंने तत्काल राहत के तौर पर निर्देश दिया कि जब तक सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किया जाता, तब तक दिन में तीन बार—सुबह, दोपहर और शाम—डाला नगर पंचायत द्वारा सड़क पर पानी का छिड़काव कराया जाएगा ताकि उड़ती धूल से राहत मिल सके।स्थानीय लोगों ने बताया कि डाला वैष्णो मंदिर के पास चोपन-गढ़वा और चोपन-सिगरौली मार्ग को जोड़ने वाले पुल संख्या 382 आरओबी में दरार आने के कारण 19 जून 2023 से पुल पर तीन मीटर का हाइटगेज लगाया गया, जिसके चलते भारी वाहनों का आवागमन डाला लालबत्ती और गजराज नगर की ओर मोड़ दिया गया। इसी कारण डाला-गजराज नगर तक का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग के संबंध में कई बार जिला प्रशासन को पत्रक एवं ज्ञापन दिए जा चुके हैं। स्थानीय अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने डाला लालबत्ती से ओबरा गजराज नगर तक सड़क मरम्मत के लिए लगभग 4.18 करोड़ रुपए की स्वीकृति जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड से प्रदान की थी। मगर अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा है और कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।स्थानीय लोगों ने कहा कि डाला-ओबरा मार्ग इस क्षेत्र की ‘लाइफ लाइन’ है, जिससे प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। सड़क की बदहाली के कारण न केवल आमजन बल्कि स्कूली बच्चों, व्यावसायिक वाहनों व एंबुलेंस तक को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वह बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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