तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। डाला नगर पंचायत क्षेत्र में इन दिनों नगर अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के बीच तालमेल की कमी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बाजार क्षेत्र और वार्डों में चर्चा है कि अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत अध्यक्ष की बात को न तो महत्व देते हैं, न ही जनप्रतिनिधि के निर्देशों का पालन करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर नगर में होने वाले कार्यों को अध्यक्ष की अनुपस्थिति में मनमाने ढंग से कराते हैं, जिससे पारदर्शिता और जनता की भागीदारी पर प्रश्न उठ रहे हैं।बताया जा रहा है कि डाला की नगर पंचायत अध्यक्ष एक आदिवासी समाज से आने वाली महिला हैं, जिन्हें जनता ने नगर के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में जब उनके आदेशों की अनदेखी की जा रही है, तो यह जनता के जनादेश का भी अपमान माना जा रहा है। गौरतलब है कि 15 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन जिले में होने जा रहा है, जो आदिवासी समाज के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में होगा। इसी पृष्ठभूमि में नगर पंचायत की प्रथम नागरिक की अनसुनी होना सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम मुद्दा बन गया है।मिली जानकारी के अनुसार, 10 नवंबर को वार्ड नंबर 7 की चूड़ी गली में नाली निर्माण कार्य के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष मौके पर पहुंचीं। निरीक्षण के बाद उन्होंने पाया कि नाली पूर्व निर्धारित स्थान के बजाय गलत दिशा में बनाई जा रही थी, जिससे सड़क संकरी होने का खतरा था। अध्यक्ष ने तत्काल निर्माण कार्य को रोकने का निर्देश दिया और कहा कि सड़क की नापी कराए बिना कार्य दोबारा शुरू न किया जाए। लेकिन अध्यक्ष के लौटते ही अधिशासी अधिकारी मौके पर पहुंचे और नाली निर्माण कार्य को पुनः शुरू करा दिया। इससे यह साफ झलकता है कि अधिशासी अधिकारी अध्यक्ष के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिसकी चर्चा पूरे नगर में फैल गई है।स्थानीय निवासियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब एक निर्वाचित नगर अध्यक्ष की बात को अधिकारी नहीं सुनते, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा? लोगों ने मांग की कि ऐसे अधिकारी को तत्काल हटाया जाए जो अपने जनप्रतिनिधि की बात भी नहीं मानता। साथ ही नागरिकों ने यह भी आग्रह किया कि सड़क का निर्माण पुराने मार्ग पर ही किया जाए ताकि सड़क संकरी न हो। यदि सड़क गलत दिशा में बनी तो यातायात व्यवस्था बिगड़ जाएगी।निवासियों ने यह भी बताया कि यह वही पुराना मार्ग है जो कोन के व्यापारियों की आवाजाही का मुख्य रास्ता रहा है और जो मंत्री संजीव सिंह गोंड के घर के बगल से अम्मा टोला कोटा मार्ग से जुड़ता है। यह मात्र 700 मीटर लंबा मार्ग है, जिसे यदि जोड़ दिया जाए तो इलाके का यातायात पहले की तरह सुचारू हो जाएगा। लेकिन सड़क और नाली निर्माण में गड़बड़ी से लोगों के आवागमन में कठिनाई बढ़ सकती है।लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री के अतिक्रमण हटाने के आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो इसे शासनादेश की अवहेलना माना जाएगा। फिलहाल पूरा क्षेत्र इस प्रशासनिक विवाद को लेकर चर्चा में है, और सबकी निगाहें आगामी दिनों में सरकार और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।






