तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
(सोनभद्र)पिपरी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (जल विद्युत स्कंध) ने साफ किया है कि रिहंद बांध एवं जल विद्युत परियोजना से संबद्ध रिहंद आवासीय कॉलोनी की समस्त भूमि और स्थायी संपत्तियाँ निगम की विधिवत अधिग्रहित संपत्तियाँ हैं। निगम प्रशासन ने इसे लेकर एक स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि इन परिसरों की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, निर्माण या बाहरी विभागीय हस्तक्षेप पूरी तरह अवैध हैं और ऐसा करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।निगम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि रिहंद परियोजना क्षेत्र एवं उससे जुड़ी आवासीय कॉलोनी की भूमि पर न तो वन विभाग, न ही नगर पंचायत और न ही किसी अन्य सरकारी निकाय का कोई वैध अधिकार है। उक्त भूमि जल विद्युत स्कंध, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसके अंतर्गत किसी भी विभाग द्वारा हस्तक्षेप करना कानून के दायरे में अपराध माना जाएगा।निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि परियोजना की भूमि या संपत्तियों पर कब्जे, निर्माण या विभागीय गतिविधियों को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक भू-गृहदि (अपराधिकृत अध्यसिनी की बेदखली) अधिनियम-1972 के अंतर्गत दंडनीय माना जाएगा। इस अधिनियम के तहत अवैध कब्जा या अनधिकृत हस्तक्षेप करने वाले व्यक्ति अथवा विभाग के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकती है।परियोजना प्रमुख, रिहंद व ओबरा परियोजनाओं ने कहा कि निगम की परिसंपत्तियों की सुरक्षा, स्वामित्व और वैधता सुनिश्चित रखना निगम प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार का अवांछित, अवैध या विभागीय हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य किसी के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि निगम की वैध सीमा और संपत्ति की सुरक्षा बनाए रखना है।प्रमुख ने नागरिकों व स्थानीय निकायों से अपील की है कि यदि किसी स्थान के स्वामित्व को लेकर कोई संदेह हो तो पहले तथ्य और अभिलेखों की जांच कर लें। निगम की भूमि या संपत्ति से संबंधित किसी भी कार्यवाही से पूर्व विभागीय अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति के किया गया कोई भी निर्माण, कब्जा या गतिविधि अतिक्रमण मानी जाएगी और संबंधित व्यक्ति या विभाग को कानूनन दंडित किया जाएगा।






