तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
शक्तिनगर। युवाओं में सेवा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, एनटीपीसी परिसर शक्तिनगर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई प्रथम एवं तृतीय द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर (दिन-रात) के चौथे दिन का कार्यक्रम शनिवार को चिल्काडांड ग्राम स्थित पंचायत भवन में उत्साह और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान स्वयंसेवकों ने योगाभ्यास, बौद्धिक परिचर्चा और प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्वास्थ्य व प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन योग सत्र से हुई, जिसमें प्रसिद्ध योगाचार्य सचिन तिवारी ने स्वयंसेवकों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी दूर होता है और व्यक्ति संतुलित जीवन जी सकता है। योगाचार्य ने विशेष रूप से ऐसे योगासन करवाए जो डायबिटीज, उच्च रक्तचाप (बीपी) और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होते हैं।योगाचार्य सचिन तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग ही ऐसा माध्यम है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित रखता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को बताया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है जो व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं को भी योगाचार्य के सामने रखा, जिनका उन्होंने सरल और प्रभावी तरीके से समाधान बताया।
शिविर के द्वितीय सत्र में “जल संरक्षण एवं प्रकृति संरक्षण” विषय पर एक बौद्धिक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनोद कुमार पाण्डेय ने “जल ही जीवन है” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे जल संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
वहीं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. छोटे लाल प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जल बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करें और स्वयं भी जल के सदुपयोग की आदत अपनाएं।
दोपहर के भोजन के बाद शिविर में एक रोचक और ज्ञानवर्धक गतिविधि के तहत लगभग 100 स्वयंसेवकों को अलग-अलग टोलियों में विभाजित कर जल संरक्षण विषय पर अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता के माध्यम से स्वयंसेवकों ने गीतों, नारों और संदेशों के जरिए जल बचाने और प्रकृति की रक्षा करने का संदेश दिया। प्रतियोगिता के दौरान शिविर स्थल पर मौजूद स्थानीय नागरिकों ने भी युवाओं के उत्साह और रचनात्मकता की जमकर सराहना की।
पूरा शिविर परिसर दिनभर ऊर्जा और सकारात्मक माहौल से सराबोर रहा। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस आयोजन को सफल बनाने में दिव्या कुमारी, साक्षी दुबे, अंजना, ज्योति, नैंसी, प्रिया, शिवांशु, विशेष, प्रभा, आशुतोष, पंकज, रितेश और कोमल सहित कई स्वयंसेवकों की सराहनीय भूमिका रही।
राष्ट्रीय सेवा योजना के इस विशेष शिविर के माध्यम से युवाओं को स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शिविर में आयोजित विभिन्न गतिविधियां न केवल स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व विकास में सहायक साबित हो रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं।






