तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र।शहीद दिवस के पावन अवसर पर करारी स्थित शहीद स्थल एक बार फिर देशभक्ति की भावना से सराबोर नजर आया, जब शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी के तत्वावधान में सोमवार को भव्य एवं बहुआयामी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पूरा परिसर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा, जहां हर दिल में देश के वीर सपूतों के प्रति श्रद्धा और गर्व साफ झलक रहा था।
कार्यक्रम की शुरुआत तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और दीपदान कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों—संरक्षक रामनाथ शिवेन्द्र, समाजसेवी कमलेश खांबे, राष्ट्रपति व राज्यपाल से सम्मानित शिक्षक ओमप्रकाश त्रिपाठी, बार अध्यक्ष अशोक कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
काव्य और विचारों में दिखा राष्ट्र प्रेम का ज्वार
वरिष्ठ कवि शिवदास (चंदौली) ने अपनी ओजस्वी वंदना और देशभक्ति रचनाओं से माहौल में जोश भर दिया। भदोही से आए कवि संदीप कुमार बालाजी की नाट्य कृति “अमरो बीरा” का भव्य विमोचन किया गया, जो शहीद-ए-आजम भगत सिंह को समर्पित रही।
ओमप्रकाश त्रिपाठी ने “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की व्याख्या करते हुए मातृभूमि के महत्व को रेखांकित किया, वहीं रामनाथ शिवेन्द्र ने शहीदों के जीवन, संघर्ष और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समाज को “युद्ध नहीं, बुद्ध” का संदेश दिया।
समाजसेवी कमलेश खांबे ने बताया कि भगत सिंह को “शहीद-ए-आजम” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने कम उम्र में सबसे बड़ा बलिदान देकर पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया।
सम्मान और अभिनंदन से बढ़ा आयोजन का गौरव
कार्यक्रम में सभी अतिथियों और कवियों को अंगवस्त्र, लेखनी और पुस्तकों से सम्मानित किया गया। प्रथम सत्र का संचालन अशोक तिवारी एडवोकेट ने किया।
कवि सम्मेलन में बिखरे हर रंग—ओज, श्रृंगार और हास्य
दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन ने आयोजन को चरम पर पहुंचा दिया। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने “मुझको अबला मत समझो…” सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। गीतकार दिलीप सिंह दीपक ने “हिंदुस्तान मत बेचो” के संदेश से लोगों को झकझोरा।
सारिका श्रीवास्तव, सुधाकर पांडेय, ईश्वर विरागी, प्रभात सिंह चंदेल और संदीप बालाजी ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से शहीदों को नमन किया। वहीं धर्म देव चंचल ने हास्य व्यंग्य से माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया।
डा. सीमा सिंह ने दार्शनिक और समसामयिक कविताओं के माध्यम से समाज को सोचने पर मजबूर किया। सुशील मिश्रा ने लोकगीत “देशवा हमार शहीदन के सपनवां” प्रस्तुत कर सभी की आंखें नम कर दीं।
बड़ी संख्या में जुटे लोग, देर तक गूंजता रहा जयघोष
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों, समाजसेवियों, अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। अंत में वरिष्ठ शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने आभार व्यक्त किया।
इस आयोजन ने न सिर्फ शहीदों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को भी प्रज्वलित करने का काम किया।






