शिक्षामित्र पर संगीन आरोप आदिवासी महिला को भगाने के मामले में कोर्ट सख्त एफआईआर के आदेश

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र। जिले के मांची थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें पनौरा के एक शिक्षामित्र पर आदिवासी महिला को भगाकर अपने पास रखने और उसके पति के साथ मारपीट व धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, सोनभद्र की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और उच्चाधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, मांची थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 48 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति ने अधिवक्ता नरेंद्र प्रताप सिंह के माध्यम से न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। पीड़ित के मुताबिक, 4 नवंबर 2025 को उसकी 45 वर्षीय पत्नी अचानक लापता हो गई। परिजनों ने हर संभव स्थान पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
करीब दो सप्ताह बाद, 20 नवंबर 2025 को गांव के ही लोगों ने बताया कि पनौरा में तैनात शिक्षामित्र संतोष यादव उसकी पत्नी को भगाकर ले गया है। यह जानकारी मिलते ही पीड़ित अगले दिन 21 नवंबर 2025 को पनौरा स्थित विद्यालय पहुंचा और आरोपी से पत्नी के बारे में पूछताछ की।
आरोप है कि इसी दौरान शिक्षामित्र संतोष यादव ने उसे पकड़कर स्कूल परिसर से बाहर खींच लिया, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जमीन पर पटक दिया, जिससे उसे चोटें आईं। इतना ही नहीं, आरोपी ने उसे जान से मारने और उसकी पत्नी को बाहर राज्य में बेच देने तक की धमकी दी। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
पीड़ित ने उसी दिन पनौरा चौकी पर शिकायत दी, लेकिन उसे मांची थाने जाने को कहा गया। वहां भी सुनवाई न होने पर उसने 24 नवंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।अंततः न्याय न मिलने पर पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट का सख्त आदेश:
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने अधिवक्ता के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद इसे गंभीर अपराध मानते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। अदालत ने प्रभारी निरीक्षक मांची को निर्देश दिया है कि आरोपी शिक्षामित्र संतोष यादव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
साथ ही, मामले की जांच क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारी से कराई जाए और जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।

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