भदोही पार्ट 3 तो यहां से शुरू हुआ विजय मिश्रा का पतन?”

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज –

2009 मे प्रदेश मे बसपा की सरकार थी और एमएलसी का चुनाव होना था, मिर्ज़ापुर – सोनभद्र सीट पर निगाह थी बनारस के माफिया श्याम नारायण सिँह उर्फ़ विनीत सिँह की | विनीत सिँह मिर्ज़ापुर आये और मिर्ज़ापुर की राजनीती मे पहली बार स्कार्पियो का काफिला सड़को पर दिखना शुरू हुआ,गोरा लम्बा ब्लैक बेल्ट आदमी एक अलग चार्म बनने लगा विनीत सिँह के लिए | मिर्ज़ापुर के लोकल क्षत्रियों ने उनका जोरदार समर्थन किया क्यूंकि उन्हें खुद एक दबंग व्यक्ति की जरूरत थी | और उस समय विनीत सिँह की हनक भी खूब थी, साफ शब्दों मे कहे तो वो उस समय प्योर माफिया थे, एक किस्सा है की उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे एक पटेल केंडिडेट की गाड़ी उनके सामने आ गई, उनके आदमियों ने बहुत बुरी तरीके से इतना हड़काया की वो फिर पुरे मन से चुनाव ही नहीँ लड़ पाए, उनके समर्थको को उठाया जाने लगा और अंततः एमएलसी का चुनाव विनीत सिंह बहुत आसानी से जीत गए |
फिर 2010 मे जिलापंचायत अध्यक्ष के चुनाव मे विनीत सिँह ने अपनी पत्नी को चुनाव जितवाकर खुद को मिर्ज़ापुर की राजनीती मे स्थापित कर लिया |

2010 मे बसपा की सरकार थी, इलहाबाद मे केबिनेट मंत्री थे नंदगोपाल गुप्ता नंदी जो की आज बीजेपी सरकार मे केबिनेट मंत्री है,नंदी पर RDX से हमला हुआ जिसमे 3 लोग मारे गए 2 पत्रकार और 1 नंदी का सहायक, नंदी बुरी तरह घायल हुऐ और करीब 6 महीने हॉस्पिटलाइज रहे
हमले का आरोप दिलीप मिश्रा और उनके रिश्तेदार विजय मिश्रा पर लगा, विजय मिश्रा 2 साल फरार रहे और दिल्ली मे बड़े नाटकीय ढंग से साधु वेश मे गिरफ्तारी दिए | दिलीप मिश्रा पर फिर बात कभी होंगी क्यूंकि वो भी शख्स गज्जब नामी है |
विजय मिश्रा द्वारा ये कोई पहला हाई प्रोफ़ाइल कांड नहीँ था बल्कि इससे पहले वो भदोही के ही पूर्व सांसद गोरखनाथ पाण्डेय के छोटे भाई रामेश्वर पाण्डेय की चुनाव के दिन ह”त्या का आरोप लगा था | भदोही के ही पूर्व केबिनेट मंत्री राकेश धर त्रिपाठी के छोटे भाई धरनीधर त्रिपाठी की हत्या का भी आरोप था|
इसके पहले वो मुख़्तार अंसारी के साथ 1997 मे विश्व हिन्दू परिषद के बड़े नेता और बड़े व्यापारी नन्द किशोर रूंगटा की ह”त्या के नामजद आरोपी हो चुके थे |
कांस्टेबल महेंद्र मिश्रा की ह”त्या का आरोप उन पर लगा |एक ब्राह्मण ब्लॉक प्रमुख की ह”त्या का आरोप विजय मिश्रा पर लगा |

2012 मे वो तीसरी बार विधायक बने और सपा की सरकार बनी और अब विजय मिश्रा और ज्यादा ताकतवर हो चुके थे, धीरे धीरे इलाहबाद क्षेत्र मे भी उनका डंका बजने लगा |

फिर आया 2014 का समय और फिर आई नरेंद्र मोदी की आंधी और केंद्र मे बीजेपी की सरकार बनी | विजय मिश्रा ने भदोही लोकसभा से अपनी बेटी सीमा मिश्रा को चुनाव लड़वाया था और बीजेपी से चुनाव लड़ रहे थे वीरेन्द सिंह मस्त और वीरेंद्र सिँह मस्त लहर मे ये चुनाव बड़ी आसानी से जीत गए |

2015 मे एक ऐसी घटना घटी जिससे ये कयास लगाए जाने लगे की पूर्व विधायक उदयभान सिँह विजय मिश्रा की ह”त्या करवाना चाहते थे, दरअसल हुआ यू की 1999 गोपीगंज तिहरा हत्याकांड मे आरोपी संजय सिँह जो की उदयभान सिंह का साला थे और जेल काट रहे थे, उसने बीमारी का बहाना बनाकर इलाहबाद के हॉस्पिटल मे एडमिट हो गया और फिर पुलिस को चकमा देकर वो फरार हो गया |

पुलिस को मुखबिरी मिली की वो इलाहाबाद से भदोही जाकर विजय मिश्र की ह”त्या करना चाहता है, पुलिस एक्टिव हुई और 2दिन बाद संजय सिंह को झूंसी से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता है |

2015 का आया फिर पंचायती चुनाव, पंचायती चुनाव और एमएलसी चुनाव तो वैसे सत्ता पक्ष का चुनाव होता है लेकिन हुआ यू की सपा सरकार होते हुऐ मिर्ज़ापुर से विनीत सिँह ने अपनी पत्नी को बसपा से जिलापंचायत अध्यक्ष बनवा दिया | ये बात मुख्यमंत्री अखिलेश जी को खटक गई और उन्हें सबक सिखाने की सोची |

फिर आया साल 2016 एमएलसी का चुनाव और इस साल विजय मिश्रा से ऐसी गलती हुई या कहे उन्होंने मधुमक्खी के छत्ते मे हाथ डाल दिया की वही से उनके पतन की कहानी की नींव पड़नी शुरू हो गई |

हुआ यू की अभी तक विजय मिश्रा इसलिए शांति से राज कर रहे थे क्यूंकि उन्होंने अत्यधिक महत्वकांशा नहीँ पाली थी और वो सारा ध्यान भदोही पर ही देते थे, उनके अपने जिले के नेताओं से भले रिश्ते खराब हो चुके थे लेकिन अगल बगल जिले के सभी बाहुबलीओ से मधुर संबंध थे चाहे वो राजा भैया हो अतीक अहमद हो करवरिया बंधु बृजेश सिँह हो या मुख़्तार अंसारी हो या धनंजय सिँह हो |
लेकिन 2016 मे अखिलेश जी का आदेश और दूसरा उनका खुद का मिर्ज़ापुर मे अपना दखल बढ़ाने की इच्छा क्यूंकि मिर्ज़ापुर सिर्फ मिर्ज़ापुर नहीँ बल्कि सोनभद्र का भी रास्ता खोलता है जहाँ पर खनन का अकूत पैसा है, जहाँ पर कई सालो से बृजेश सिंह और मुख़्तार अंसारी की ही जोर आजमाइश चलती थी क्यूंकि सोनभद्र बहुत शांत जिला है और यहां कभी कोई नामी दबँग हस्ती नहीँ हुआ |
अखिलेश जी ने मिर्ज़ापुर सोनभद्र एमएलसी पद के लिए विजय मिश्रा की पत्नी रामलल्ली मिश्रा को उम्मीदवार बना दिया और यही वो समय है ज़ब विजय मिश्रा के पतन की नींव पड़ गई…

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