नगर पंचायत ओबरा में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितता,भ्रष्टाचार से लोगो मे आक्रोश

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – रीना राय

डाला / सोंनभद्र

ओबरा सोनभद्र जनपद के नगर पंचायत ओबरा में विकास कार्यों के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताओं और गंभीर भ्रष्टाचार का मामला गर्माता जा रहा है। क्षेत्र में चल रहे सड़क और नाली निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय करदाताओं और नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। हालात को देखकर अब सीधे तौर पर यह सवाल उठने लगा है कि नगर पंचायत प्रशासन जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए काम कर रहा है या फिर यह सब केवल सरकारी बजट की बंदरबांट और कमीशनखोरी का जरिया बन चुका है। क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत तकनीकी रूप से बेहद चौंकाने वाली है। सड़क निर्माण में समतलीकरण का कोई ध्यान नहीं रखा गया है कहीं सड़क को अत्यधिक नीचे बना दिया गया है, तो कहीं आगे जाकर अचानक हिस्सा ऊंचा कर दिया गया है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि सड़कों को समतल नहीं किया गया और नालियों का ढलान सही नहीं हुआ, तो आने वाले मानसून में पूरा इलाका टापू बन जाएगा और घरों में गंदा पानी घुसना तय है। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि यह पूरा क्षेत्र शक्ति नगर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है, जहाँ नियमत हर निर्माण कार्य जनसुविधा और व्यवस्थित जल निकासी के कड़े मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इसके बावजूद, सड़कों पर जमे रसूखदार कब्जाधारियों के अतिक्रमण को हटाने की हिम्मत नगर पंचायत नहीं दिखा पा रही है। जनता पूछ रही है कि आखिर किस राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में आकर अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माण कार्य में घोर लापरवाही बरतते हुए कई जगहों पर मकान मालिकों की निजी बाउंड्री वॉल का सहारा लेकर मिट्टी की भराई की जा रही है, जो भविष्य में बड़े विवाद और हादसों का कारण बन सकती है। कई इलाकों में तो बिना नाली का प्रावधान किए ही आनन-फानन में सीधे सड़क बिछा दी गई है। नगर पंचायत की कार्यशैली पर सबसे गंभीर सवाल योजना के चयन को लेकर उठ रहे हैं। जिन क्षेत्रों में अभी कोई आबादी नहीं है और सिर्फ खाली व्यावसायिक या निजी प्लॉट पड़े हैं, वहाँ ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए नियम विरुद्ध तरीके से चमचमाती सड़कें और नालियां खड़ी कर दी गई हैं। इसके विपरीत, जहाँ घनी आबादी है और लोग वर्षों से कीचड़ व जलभराव की मार झेल रहे हैं, उन वास्तविक ज़रूरत वाले स्थानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, तो करोड़ों रुपये के इस संगठित भ्रष्टाचार का एक बड़ा भंडाफोड़ हो सकता है। इतनी गंभीर शिकायतों और जमीनी विसंगतियों के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी कई तरह के संदेहों को जन्म दे रही है। जब इस संबंध में हमारे संवाददाता द्वारा संबंधित विभागीय अधिकारियों से लिखित और मौखिक रूप से संपर्क साधा गया, तो जमीनी कार्रवाई के बजाय केवल कागजी नियम-कानूनों का पाठ पढ़ाकर मामले को टालने का प्रयास किया गया। मौके पर मानकों के विपरीत हो रहे घटिया निर्माण को रोकने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी आगे नहीं आया। अब ओबरा की जनता सीधे प्रशासन से जवाब मांग रही है। क्या नगर पंचायत का वास्तविक उद्देश्य जनहित में विकास करना है या फिर अव्यवस्थित निर्माण के जरिए मोहल्लेवासियों को आपस में लड़ाकर विवाद पैदा करना है। क्या जनता की गाढ़ी कमाई का टैक्स और सरकारी धन सिर्फ कागजों पर ऑल इज वेल दिखाने और अधिकारियों-ठेकेदारों की जेबें भरने का माध्यम मात्र रह गया है। स्थानीय निवासियों ने चेताया है कि यदि इस घटिया निर्माण को तुरंत रोककर मानकों के अनुसार काम शुरू नहीं कराया गया और अतिक्रमण नहीं हटा, तो वे मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर जिला मुख्यालय तक उग्र आंदोलन और शिकायत दर्ज कराने को बाध्य होंगे।

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