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गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और थाना साहिबाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है।
डीसीपी ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे। आरोपी विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे तथा नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का दावा करते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी मनी, प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर पीड़ितों से ऑनलाइन रकम वसूल लेते थे। पैसा मिलने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ितों से संपर्क समाप्त कर देते थे।
पुलिस को इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और थाना साहिबाबाद पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से गिरोह के ठिकानों की पहचान कर छापेमारी की गई, जिसमें 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की पहचान की जा सके।
डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था को ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल अवश्य करें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।






