तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – महेन्द्रराज शुक्ल
घाटमपुर(का.दे)/ कानपुर
पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनो की चीख पुकार आम बात है, लेकिन गुरुवार को जब दो बहनों ने राखी बांधकर भाई को अंतिम विदाई दी तो उनका दर्द देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख से आंसू निकल आए। यह दर्द इसलिए भी और रुला देने वाला था, क्योंकि दो बहनों के बीच वह इकलौता भाई था और राखी का त्योहार सन्निकट है।
बताते चलें घाटमपुर में पालीटेक्निक छात्र हर्षित सचान की बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव अंतिम संस्कार के लिए जाने को हुआ तो हर्षित की दोनों बहनें वहां पहुंच गईं। भाई के शव को देखकर दोनों बहनें दहाड़ें मारकर रोने लगीं। स्वजन ने उन्हेंं संभालने की कोशिश की, लेकिन राखी के चंद दिनों पहले जिन बहनों का इकलौता भाई छिन जाए, उन्हेंं कैसे दिलासा दिया जा सकता था। इसके बाद दोनों ने अंतिम यात्रा पर जाने से पहले भाई की कलाई पर राखी बांधी। निशी ने बताया कि हर्षित की जिद थी कि जो भी राखी उसे रक्षाबंधन पर बांधी जाए, उसे पहले दिखाई जाए। इसीलिए वे रक्षाबंधन से पहले राखियां खरीद लेती थीं। इस बार भी उन्होंने राखी खरीद ली थी। हर्षित राखी देखकर काफी खुश हुआ था। उन्हेंं क्या पता था कि राखी से चार दिन पहले ईश्वर उनका भाई छीन लेगा।
मित्र पुलिस की भूमिका पर एक बार फिर लगा प्रश्न चिन्ह?
पिता ने लगाए गंभीर आरोप : हर्षित के पिता गिरीश कुमार सचान ने कानपुर आउटर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सी.एच.सी से घायल बेटे को हैलट के लिए रेफर किया गया। एंबुलेंस से उसे लेकर जा रहे थे। रास्ते में दस किमी आगे पुलिस ने उन्हेंं एंबुलेंस से उतार कर एक लोडर में से रवाना कर दिया। लोडर चालक उन्हेंं लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। वहां पर कर्मचारियों ने सांसें चलने की बात कही तो वह उसे लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे। करीब एक घंटे इलाज के बाद हर्षित ने दम तोड़ दिया। बहनों का भी कहना है कि अगर भाई को एंबुलेंस से सीधे अस्पताल भेंजा जाता तो जान बचाई जा सकती थी। पुलिस की लापरवाही से उनके भाई की जान चली गई।
पोस्टमार्टम में पुलिस को हर्षित के सिर में फंसी 315 बोर की गोली मिली है। पोस्टमार्टम में सिर की दो हड्डियां टूटी मिली हैं। गोली हड्डियों के बीच में फंसी थी। अधिक खून बहने से मौत होने की बात सामने आई है।






