तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – मिथलेश कुमार
म्योरपुर / सोनभद्र
दक्षिणांचल में महिलाओ को स्वावलंबी और पोषण की पूर्ति के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी मसरूम उत्पादन द्वारा पोषण सुधार एवं आजीविका सुधार आदिवासी उप परियोजना के तहद मसरूम की खेती के जरिये स्वावलंबी बनाने के लिए चोपन ब्लॉक के जुगैल ,म्योरपुर बभनी दूधी ब्लॉक के 18 महिलाओ को मंगलवार को बनवासी सेवा आश्रम के प्रांगण में प्रशिक्षण देने के साथ सभी को किट वितरित किया।आई बी आर वैज्ञानिकों का मानना है कि मसरूम और सब्जी की खेती के आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में पोषण की कमी दूर होगी और लोग आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। आई बी आर के मसरूम उत्पादन के विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ सुदर्शन मौर्यने बताया कि सीजन के अनुसार सितंबर अक्टूबर में 18 से 20 दिन और दिसम्बर जनवरी में 22 से 26 दिन में मसरूम तैयार हो जाता है।इसकी अनेक प्रजातियां भी है और स्वाद भी अलग अलग है। डॉ मौर्य ने बताया कि मसरूम सेवन से पोषण की पूर्ति होगी।सुगर और फ्लोराइड प्रभावित लोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है।बताया कि यह हड्डियो को मजबूत बनाता है।बौर इससे चेहरे पर झुर्रियां नही पड़ती साथ ही चेहरे पर चमक बनी रहती है ।बताया कि इसकी खेती पूरक रोजगार के रूप में किया जा सकता है।देखपाल करना भी आसान है। मसरूम शाकाहारियों के लिए नानवेज भी कहा जाता है।बताया कि यह कैंसर रोधी भी है।बताया कि यह जैविक विधि और रसायनिक विधि से तैयार की जाती है। दोनों विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओ ने उत्साह से प्रशिक्षण लिया। साथ ही बताया कि महिलाओ को उत्पादन में कोई समस्या आएगी तो उन्हें सलाह दी जाएगी।






