तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – विष्णु गुप्ता
(ॐ ब्रह्मस्त्रायविद्मही स्तंभनिवर्णायधिमही तन्नोबगलाप्रचोदयात )
यह माँ बगलामुखी अष्टम महाविद्या ब्रह्मास्त्रविद्या का वल्गागायत्री मंत्र हे ,
इस मंत्र का दोनो ही ब्रह्मास्त्रविद्या श्री भगवती गायत्री एवं पीताम्बरा श्री भगवती बगलामुखी देवीयों का आवाहन हे ,
इस मंत्र के जपने से विद्या-बुद्धी ,वाकसिद्धी एवं स्तंभन सिद्धी सहज एवं सरलता से प्राप्त हो जाती हे ।
साधना की विधि —
१- एक ऐसे शांत वातावरण को होना जहां अन्य किसी भी प्रकार का शोर ना हो । जैसे कि पर्वतों की कंद्रायें , घना वन , सतत बहती हुई सरिता के किनारे पर , पर्वतों की चोटियों पर एवं मन को शांत रखने वाले श्री महादेव के शिवालय में यह ना हो तो किसी भी ग्राम स्थान के देव मंदिर में सर्वोच्च होता हे ।
२-साधना के समय साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए एवं साधक का आसन (कुशा)उसकी गौ-मुखि भी पीली हाई होनी चाहिए एवं साधक को रुद्राक्ष की या हरिद्रा (हल्दी ) की माला को जप के लिए रखना चाहिए एवं चंदन या अष्टग़ंध का द्वादश तिलक लगा कर बैठना चाहिए ।
३-साधक को साधना काल तक पीली एवं श्वेत भोजन पदार्थ का ही दोनो में से एक का सेवन करना चाहिए ।
४- यदि साधक अवैवाहित हे तो उसको पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चहए यदि ग्रहस्थीं जीवन अर्थात् वैवहित हो तो भी उसे इस नियम का पालन करना होगा , केवल अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य स्त्री की मानसिकता नही होनी चाहिए ।
५- साधक को साधना काल तक वह स्थान छोड़कर किसी अन्यत्र स्थान पर भ्रमण करना साधक के लिए पूर्ण वर्जित हे ।
६- ध्यान रखें गुरु के बिना साधना काल तक उस साधना से भिन्न किसी ओर कार्य एवं अन्य साधना को करने के लिए अपने गुरु से परामर्श के बिना नही करनी चाहिए ।
७-पर स्त्री का भव मन में नही आना चाहिए एवं अपनी पत्नी को छोड़कर अन्य सभी स्त्री माता ,पुत्री,बहन के स्थान पर ही समझना चाहिए ।






