भूमि घोटाला-सेवा निवृत लेखपाल सहित तीन की प्राथमिकी दर्ज

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –

उन्नाव/ब्यूरो महेंद्र राज शुक्ल

सफीपुर तहसील गंगा कटरी के गांव ददलहा में फर्जी खतौनी बनाकर 3200 बीघा परती और बंजर भूमि हड़प कर उसकी बिक्री किये जाने की जांच में दोषी पाए जाने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। शनिवार को चकबंदी विभाग से इस बाबत दोषी चकबंदी लेखपाल प्रदीप कुमार चौधरी, बंदोबस्त चकबंदी लेखपाल शशिकुमार व तत्कालीन सर्वे लेखपाल अब सेवानिवृत्त नरेंद्र कुमार पर सदर कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई गई।
मामले की शिकायत ग्रामीणों ने डीएम से की थी। डीएम के निर्देश पर सहायक अभिलेख अधिकारी की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। कूटरचित फर्जी प्रविष्टियों को निरस्त कर भूमि ग्रामसभा के खाते में दर्ज कर दी गई। वहीं तत्कालीन भूलेख अधिकारी नन्हकू के उत्तरदायित्वों को निर्धारित कर उनके विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने की पत्रावली राजस्व परिषद को भेजे जाने की कार्यवाही भी अमल में लाने के निर्देश हैं। डीएम रवींद्र कुमार की इस कार्यवाही से फर्जीवाड़े में शामिल लोगों में खलबली मची है। ददलहा गांव जमीनों की हेराफेरी के मामले में लंबे अर्से से सुर्खियों में रहा है। कई प्रकरण उच्च न्यायालय भी जा चुके हैं। बताया जाता है कि तहसील अभिलेखागार में रखी 1970-72, 90, 92 आदि सन की पट्टे वाली 57 ख की पत्रावलियों में कूटरचित ढंग से कटिग कर तहसील और सर्वे विभाग की साठगांठ से बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर भूमाफिया ने जमीनें हड़प लीं। कार्यरत दो लेखपालों पर एफआईआर कराए जाने के साथ ही निलंबन करके मूल विभाग चकबंदी भेजे जाने की तैयारी भी पूरी हो गई है।


इन पर कब होगी कार्रवाई
ददलहा ग्राम सभा की जमीन अभिलेखीय हेराफेरी कर नाम दर्ज कराने वाले रजवाखेड़ा, लोधवाखेड़ा परगना हड़हा के रमेश, देवी प्रसाद, देवीदीन अन्य के विरुद्ध दर्ज जमीन को ग्राम समाज में भेजे जाने के लिए शासकीय अधिवक्ता राजस्व को विधिक प्रक्रिया के तहत कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन बैनामों को भी निरस्त कराए जाने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी ने शासकीय अधिवक्ता को सौंपी है।

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