रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, खदान सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल 24 घंटे में सिर्फ एक शव बरामद, 12 से अधिक मजदूरों के दबे होने की आशंका

तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र। जनपद के ओबरा नगर स्थित बिल्ली खनन क्षेत्र में शनिवार 3 बजे के आसपास हुआ भीषण हादसा अब पूरे जिले की चिंता का विषय बन गया है। भारी चट्टानों के अचानक धंसने से खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। घटना शनिवार 15 नवंबर 2025 को हुई, जिसके बाद से 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राहत और बचाव कार्य बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।अब तक केवल एक मजदूर का शव बरामद किया जा सका है, जबकि 12 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका अभी भी बनी हुई है। मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीमों का कहना है कि मलबा अत्यधिक भारी है और अंदर तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।अफरा-तफरी के बीच प्रशासनिक हलचल, 24 घंटे से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, मंडल तक की प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंची। भारी मशीनरी लगाकर मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
लेकिन गहराई में दबे मजदूरों के कारण बचाव कार्य में काफी जोखिम बना हुआ है।रेस्क्यू टीमों के अनुसार, पत्थर अत्यधिक भारी, जिससे ऑपरेशन और भी मुश्किल हो गया है। खदान में पानी और पत्थर भसकने के कारण भी बचाव में बाधा आ रही है।ओबरा थाने में मृतक के भाई की तहरीर पर 3 पर FIR—105 BNS के तहत कार्रवाई हादसे के बाद मृतक के भाई छोटू यादव की तहरीर पर पुलिस ने तीन व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।FIR में शामिल नाम मधुसूदन सिंह,दिलीप केसरी अज्ञात कृष्णा माइंस वर्क्स का मालिक इन पर धारा 105 BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो मृत्यु कारित लापरवाही और जोखिमपूर्ण कार्य के लिए कठोर दंड के दायरे में आता है।सपा सांसद और पुलिस आमने-सामने—खदान में प्रवेश को लेकर नोकझोंक घटना के बाद सपा नेता और सांसद छोटेलाल खरवार पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए खदान क्षेत्र पहुंचे।लेकिन पुलिस द्वारा अंदर जाने से रोके जाने पर सांसद और पुलिस कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांसद बार-बार पीड़ित परिवारों से मिलने की बात कहते रहे, जबकि पुलिस सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोकती रही।
इस विवाद ने मौके पर तनाव का माहौल बना दिया।खदान सुरक्षा पर बड़े सवाल—क्या लापरवाही थी हादसे की वजह?स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान में सेफ्टी गार्डलाइन का पालन नहीं हो रहा था।मजदूर बिना उचित सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे थे।गहरी दरारें पहले से मौजूद थीं, लेकिन काम रोका नहीं गया।खदान संचालन में ठेकेदारों की मनमानी चरम पर थी इस हादसे ने एक बार फिर खदानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।परिवारों में मातम, गांवों में दहशत—अगला शव किसका होगा, यही डर…दबे मजदूरों के परिवार खदान के बाहर बैठकर हर पल अपने प्रियजनों के जीवित निकलने की उम्मीद लगा रहे हैं।चिल्लाहट, रोना-पीटना और अफरातफरी का माहौल लगातार बना हुआ है।कई गांवों में लोगों ने कहा मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं… जो जाता है, उसका घर बर्बाद हो जाता है। अब दिख रही निष्पक्ष जांच की मांग—जिला ही नहीं, राज्य भी सवालों के घेरे में यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि खदान संचालन की अव्यवस्था और सुरक्षा लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया है।सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने मांग की है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए,दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो खदानों की सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा हो मजदूरों को बीमा और मुआवजा तुरंत दिया जाए अभी भी चल रही उम्मीद—शायद कोई जिंदा मिल जाए…रेस्क्यू टीम का कहना है कि वे आशा नहीं छोड़ रहे हैं और उम्मीद है कि अंदर फंसे मजदूरों में कोई जीवित मिल सके।हालांकि समय बीतने के साथ इस उम्मीद की डोर कमजोर होती जा रही है।यह हादसा सोनभद्र ही नहीं, पूरे प्रदेश की खदान सुरक्षा व्यवस्था पर करारा सवाल है।लोगों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई और रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं।

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