किडनी रोग से लंबी जंग के बाद ली अंतिम सांस, जनपद में शोक की लहर
तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र (दुद्धी)।
दुद्धी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति को दशकों तक दिशा देने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक विजय सिंह गोंड का गुरुवार को निधन हो गया। 71 वर्षीय विजय सिंह गोंड लंबे समय से किडनी संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही दुद्धी सहित पूरे सोनभद्र जनपद में शोक की लहर दौड़ गई।
विजय सिंह गोंड आठ बार दुद्धी विधानसभा क्षेत्र संख्या 403 से विधायक चुने गए थे। जनजातीय समाज की आवाज़ को विधानसभा तक मजबूती से पहुंचाने वाले वे ऐसे नेता थे, जिनका प्रभाव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और जनसरोकारों में भी उनकी गहरी पकड़ थी। उन्हें क्षेत्र में एक जमीनी, संघर्षशील और स्पष्टवादी नेता के रूप में जाना जाता था।
गरीबों–वंचितों की आवाज़ थे विजय सिंह गोंड
विजय सिंह गोंड ने अपने राजनीतिक जीवन में आदिवासी, किसान, मजदूर और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। कनहर बांध विस्थापन, वनाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं को उन्होंने सदन से लेकर सड़क तक पुरजोर तरीके से उठाया। दुद्धी क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर उनकी सक्रियता हमेशा चर्चा में रही।
राजनीतिक गलियारों में शोक
उनके निधन पर समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने कहा कि विजय सिंह गोंड का जाना न सिर्फ दुद्धी बल्कि पूरे पूर्वांचल की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वे किसी भी आम व्यक्ति की समस्या को गंभीरता से सुनते और समाधान का प्रयास करते थे।

समर्थकों और कार्यकर्ताओं में मायूसी
निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का उनके आवास पर तांता लग गया। हर आंख नम थी और हर जुबां पर सिर्फ एक ही बात—“दुद्धी ने अपना सच्चा नेता खो दिया।”
बुजुर्गों से लेकर युवा कार्यकर्ताओं तक में गहरी मायूसी देखने को मिली।
शुक्रवार को होगा अंतिम संस्कार
स्वर्गीय विजय सिंह गोंड का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दुद्धी स्थित कनहर घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक हस्तियों और आमजन के शामिल होने की संभावना है।
विजय सिंह गोंड भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संघर्ष, विचार और जनसेवा की विरासत दुद्धी की राजनीति में हमेशा जीवित रहेगी।






