तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। चोपन विकास खंड के ग्राम पंचायत भरहरी स्थित महादेवी वर्मा साहित्य शोध संस्थान मंगलवार को उस समय विचारों की क्रांति का केंद्र बन गया, जब भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती ‘सामाजिक न्याय दिवस’ के रूप में पूरे जोश, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम ने न सिर्फ बाबा साहेब के विचारों को जीवंत किया, बल्कि समाज में समानता और न्याय के संदेश को नई ऊर्जा भी दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के संरक्षक डॉ. बृजेश महादेव एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। जैसे ही कार्यक्रम आगे बढ़ा, पूरा परिसर ‘जय भीम’ और ‘बाबा साहेब अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह सामाजिक चेतना से सराबोर हो गया।
मुख्य वक्ता डॉ. बृजेश महादेव ने अपने ओजस्वी संबोधन में बाबा साहेब के जीवन संघर्षों और उनके अद्वितीय योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि मानवता, समानता और ज्ञान के ऐसे वैश्विक प्रतीक हैं, जिनके विचार आज भी हर पीढ़ी को दिशा देते हैं। उन्होंने इस आयोजन को संस्थान के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि पहली बार इतने बड़े और संगठित रूप में जयंती समारोह का आयोजन किया गया है, जो भविष्य के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
डॉ. महादेव ने युवाओं और समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के मूल मंत्र—‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’—को अपने जीवन में उतारें और समाज में व्याप्त भेदभाव व कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करें।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा 14 प्रमुख समाजसेवियों का सम्मान, जिन्हें उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राज कुमार सिंह, वीरेंद्र कुमार सिंह, बलन्दर सिंह, नागेश्वर डॉक्टर, ललित कुमार सिंह, हिस्पति राम सिंह, अखिलेश कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, कृपा शंकर शर्मा, श्याम सुंदर भारती, बब्बू भारती, विजय कुमार सिंह, लाल कुमार सिंह एवं आयुश सिंह शामिल रहे। इस सम्मान समारोह ने समाज में सकारात्मक कार्यों को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बाबा साहेब का जीवन एक खुली किताब की तरह है, जिससे हर व्यक्ति धैर्य, संघर्ष और आत्मविश्वास की प्रेरणा ले सकता है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित जनसमूह ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और देश की एकता-अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया।
समारोह के भव्य समापन के साथ ही यह संदेश स्पष्ट हो गया कि भरहरी की धरती से उठी यह सामाजिक चेतना की लहर दूर-दूर तक समाज को जागरूक और संगठित करने का काम करेगी।





