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राज्यपाल ने वर्ष 2024-25 हेतु कुल 68 छात्र-छात्राओं को कुलाधिपति/कुलपति उपाधि व मेडल से किया सम्मानित
आजमगढ़ । कुलाधिपति,महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल द्वारा कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों एवं कुलपति के साथ शैक्षिक शोभा यात्रा के उपरान्त महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के द्वितीय दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ करने की घोषणा की गयी। इस अवसर पर राष्ट्रगीत के साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत व विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति की गयी।

कुलाधिपति/महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल द्वारा द्वितीय दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं की संख्या और सुविधाएँ बढ़ रही हैं, और आयोजन अच्छे ढंग से हो रहा है। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों ने परीक्षाएँ दीं, परिणाम तैयार हुआ और समय पर दीक्षांत का आयोजन हुआ। राज्यपाल द्वारा छात्रों को कड़ी मेहनत और परिश्रम से पढ़ाई करने के लिए बधाई दी गई। उन्होने छात्रों को ज्ञान के भण्डार को पढऩे के लिए प्रेरित किया, और कहा कि केवल अपने विषय तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि यदि हम ज्ञान का 0.1 प्रतिशत भी पढ़ पाते हैं, तो जीवन का कल्याण हो जाएगा और पूरे विश्व का भी कल्याण हो जाएगा। उन्होंने छात्रों से विकसित भारत बनाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों और मनीषियों ने जंगलों में रहकर, बिना किसी सुविधा, टेक्नोलॉजी या लाइट के भी संशोधन, रिसर्च, दवाइयाँ और ऑपरेशन किए, जो सब किताबों में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ महर्षि दुर्वासा, भगवान दत्तात्रेय और चंद्रमा ऋषि जैसे महामनीषियों ने तपस्या की है। यह धरती वीर कुंवर सिंह, राजा बेनी माधव सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की कर्मभूमि रही है। उन्होंने महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘‘हरिऔध’’, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, और कैफ़ी आज़मी जैसे साहित्यकारों की समृद्ध परंपरा को भी नमन किया। उन्होने कहा किविश्वविद्यालय का नामकरण महान योद्धा महाराजा सुहेलदेव के नाम पर हुआ है, जिन्होंने आक्रांता महमूद गजनवी के सेनापति सैय्यद सालार मसूद गाज़ी का मर्दन कर राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा की थी।





