तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – प्रमोद कुमार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर याद दिलाया — अब आंकड़े भी मांगे जा रहे हैं।
रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट ऑफ जुडिकेचर एट इलाहाबाद की ओर से 19 सितम्बर 2026 को प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र भेजा गया है।
विषय कोई सामान्य प्रशासनिक सूचना नहीं है।
विषय है—“7 वर्ष या उससे कम की सजा वाले अपराधों में आरोपी के जेल में रहने की जानकारी।”
पत्र में सुप्रीम कोर्ट के Satender Kumar Antil v. CBI, निर्णय दिनांक 07.10.2021 का स्पष्ट संदर्भ दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले अपराधों की Category-A में आने वाले मामलों में जमानत आवेदन पर आरोपी को अनावश्यक रूप से शारीरिक हिरासत में लेने की आवश्यकता नहीं है। पत्र में विशेष रूप से कहा गया है कि ऐसे मामलों में जमानत आवेदन पर appearance के आधार पर निर्णय किया जा सकता है अथवा जमानत आवेदन के निर्णय तक interim bail दी जा सकती है।
अब महत्वपूर्ण बात देखिए—
हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों से ऐसे आरोपियों से संबंधित डेटा मांगा है जो 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले अपराधों में जेल में बंद हैं।
और इसकी सूचना DISHA Portal के माध्यम से 21.09.2026 तक उपलब्ध कराने को कहा गया।
नीचे संबंधित न्यायालय में आदेश भी अंकित है—
“Seen. Statement Clerk to comply.”
यानी अब सवाल सिर्फ कानून की किताब में लिखे सिद्धांत का नहीं है।
सवाल यह है कि जमीन पर उसका पालन कितना हो रहा है?
क्या 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले अपराधों में हर आरोपी को जेल भेजना आवश्यक है?
नहीं।
हर गिरफ्तारी के बाद जेल—और हर जमानत के लिए पहले हिरासत—यह अपने-आप में कानून का नियम नहीं है।
Satender Kumar Antil का निर्णय इसी पूरी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण है।
अब हाईकोर्ट द्वारा मांगा गया यह डेटा यह देखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा कि—
कितने लोग ऐसे अपराधों में जेल में हैं, जहां कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अलग दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था?
यह पत्र केवल एक प्रशासनिक पत्र नहीं है।
यह आंकड़ा मांगने का आदेश है।
और आंकड़े जब सामने आएंगे, तब तस्वीर भी सामने आएगी।
जमानत कोई एहसान नहीं।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है।
और कानून का पालन पुलिस से लेकर न्यायालय तक—हर स्तर पर होना चाहिए।
Source: Registrar General, High Court of Judicature at Allahabad — Letter No. 12198/Admin G-II, dated 19.09.2026
Satender Kumar Antil v. CBI — Supreme Court judgment dated 07.10.2021